सनातन धर्म
हमारे अराध्य देव सदा हमें यही शिक्षा दिए हैं कि प्रेम अपने स्वधर्मी समुदाय से करना है और दुष्ट दलन भी अहिंसा का ही पर्याय है।
एक ओर जहां हमारे देव देवी की सौम्य मूर्तियां हैं तो वहीं दूसरी ओर उनके आयुधों में सुसज्जित विग्रह हैं।
एक ओर जहां वे प्रेम (प्यार इससे भिन्न है) की शिक्षा देते हैं तो वहीं दूसरी ओर सबल संग्रामी होने की शिक्षा देते हैं।
नन्दी महाराज सदैव ही देवाधिदेव महादेव के समक्ष सौम्य मुद्रा में ही चिर प्रतिक्षा में बैठे होते हैं।
परंतु एक यह एक दुर्लभतम विग्रह है जो संग्रामी मुद्रा में हैं।
इस विग्रह में नन्दी महाराज षष्ठभुजी हैं।
नन्दी महाराज के षष्ठ भुजाओं में भिन्न भिन्न आयुध सुसज्जित हैं।
यहां नन्दी महाराज एक रक्षक के रूप में हैं।
यह अद्भुत नन्दी विग्रह देगांव में शिवालय में स्थापित हैं।
सतारा से दक्षिण -पूर्व में पाटेश्वर है।
पाटेश्वर के निकट ही देगांव में पहाड़ी के किनारे यह महादेव मंदिर स्थित है।(चित्र - साभार)
देगांव, सतारा जनपद, महाराष्ट्र।
ॐ तत्पुरुषाय विद्महे नन्दिकेश्वराय धीमहि तन्नो वृषभः प्रचोदयात्।।
अद्वतीय सनातन धरोहर...!!
जय सनातन धर्म 🙏🚩
जय नन्दी महाराज 🙏🚩
जय महाकाल 🙏🌹🚩
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