सनातन धर्म
कुछ दिनों से हर पटल पर हर बात पर कथित हिंसा के विरोधी "अहिंसा-वादी" लेखों की भरमार हो गई है।
क्या हिंसा केवल बड़े पशुओं संग हुए हिंसा को ही माना जाना चाहिए.??
क्या unicellular/multicellular व कीट पतंग के साथ हुई हिंसा को हिंसा नहीं कहा जाएगा.??
ये जितने भी लेख लिखे गए हैं वे अधिकांश aves & mammals (पक्षी व स्तनधारी पशु) के ऊपर हुए हिंसा को ही ध्यान में रखकर लिखा गया है।
उन सभी कथित "अहिंसा-वादी" से यही जानना है कि क्या वे सभी अपने जीवन में कभी "सिल्क/रेशम/तसर" से बने हुए वस्त्र धारण किए हैं या नहीं.??
यदि हां.!! तो फिर क्या उन्होंने रेशम उत्पादन की प्रक्रिया को कभी जानने का प्रयास किया है.??
वे यदि जीव के प्रति इतना ही दयालुता का भाव रखते हैं तो सबसे पहले सिल्क उत्पादन का ही विरोध करना चाहिए.!
क्योंकि किसी निरीह प्राणी के साथ जितनी क्रूरता सिल्क उत्पादन में किया जाता है और किसी में नहीं होता है।
यदि वे ऐसा नहीं करते तो यह सेलेक्टिव "हिंसा" का विरोधी होना एक दिखावा है, भ्रम है, पाखंड है, और कुछ नहीं.!!
आप सभी भी एक बार कोकून से सिल्क उत्पादन होता हुआ अवश्य ही देखें.!
यू ट्यूब पर वीडियो भी मिल जायेगा और आप ही निर्धारित करें कि यह क्रूरता है या नहीं.!
अस्तु 🌺
जय महाकाल 🙏🌺🚩
#प्रेमझा
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