सनातन धर्म और हम

हमारे पूर्वजों ने जितने भी सनातनी शिवालयों/मन्दिरों का निर्माण किया किया है सबके पीछे कोई न कोई अद्भुत कथा छिपी हुई है।

ये कथा विश्वविख्यात वैभवशाली नेल्लीएप्पियर शिव मन्दिर के पीछे की है।

श्री नेल्लीएप्पियर प्रभु के बारे में एक कथा प्रचलित है :

एक निर्धन ब्राह्मण थे "वेद शर्मा"।
वे शिव के परम भक्त थे।
प्रतिदिन वे भिक्षाटन करते और भिक्षा में जो भी प्राप्त होता उसे अपने आराध्य देव परमपिता शिव को समर्पित कर देते थे।

एक दिन जब वे भिक्षा में प्राप्त धान को सुखा रहे थे तो अनायास ही वर्षा आरम्भ हो गई।
वेद शर्मा भयाक्रांत हो गए कि इस घनघोर वृष्टि में उसके धान बह जाएँगे तो भगवान को क्या अर्पित करेंगे.??
इसीलिए भयवश वे प्रभु से सहायता हेतु प्रार्थना करने लगे।

भगवान महादेव उनके याचना से प्रसन्न होकर धान को छाया प्रदान कर सुरक्षित बचा लिए।

इस प्रकार प्रभु भोलेनाथ के द्वारा धान की रक्षा के कारण इस स्थान को तिरुनेलवेली कहा जाता है।
(Thiru - means beautiful + Nel - means Peddy + Velli - means Fence)
और भक्तवत्सल भगवान शिव नेल्लीएप्पियर कहलाए।

एक अन्य किंवदंती के अनुसार भगवान शिव अपने लिङ्गम रूप में इस स्थान पर जब पधारे तो चारो वेदों ने इन्हें बाँस (bamboo) के रूप में छाया प्रदान किए थे।
इस प्रकार इस स्थल को 
वेणु-वनम कहा जाता है।
(Venu means Bamboo + Vanam means Forest) और भगवान को "वेणुवननाथ" कहा जाता है।

यह मन्दिर अपने "musical pillars" के कारण विश्वविख्यात हैं।
एक ही पाषाण शिला खण्ड से बने इस MUSICAL PILLARS को हाथों से थाप देने पर वैदिक शास्त्रीय संगीत के सभी सातों सुर "षडज, ऋषभ, गन्धर्व, मन्द्र, पञ्चम, धैवत, और निषाद" बजते हैं।

इस MUSICAL PILLARS के निर्माण में प्रयुक्त वास्तुकला विधि आज भी रहस्य ही बना हुआ है।

इस मन्दिर में निर्मित मूर्तियों, स्तम्भों, मण्डपम आदि उत्कृष्ट सनातनी शिल्पकला के आदर्श उदाहरण हैं।(सभी चित्र-साभार)

श्री नेल्लीएप्पियर मन्दिर, तिरुनेलवेली।

सनातनी पूर्वजों द्वारा निर्मित वैभवपूर्ण अकल्पनीय रहस्यपूर्ण धरोहर...!!!

जय सनातन धर्म🙏🚩

जय महाकाल🙏🔱🚩

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