सनातन धर्म और हम

शिल्पकला, मूर्तिकला, और वास्तुकला में कुछ अतुलनीय, अकल्पनीय देखना चाहते हैं तो आर्यावर्त में सनातनी मन्दिरों का दर्शन करने जाएं.!!

समस्त विश्व में भी ऐसा निर्माण कार्य आपको दूसरा देखने को नहीं मिल सकता है।

श्री नटराज मन्दिर, चिदम्बरम, तमिलनाडु.!
(सभी चित्र – साभार)

श्री नटराज मन्दिर देवाधिदेव शिव को समर्पित अद्भुत अनुठा वास्तुशिल्प का उदाहरण है।

चिदम्बरम मन्दिर शिव को समर्पित पञ्च-भूत स्थलों के प्रतिनिधिक पाँच पवित्र मंदिरों में से एक है।
ये सभी हैं :-

चिदम्बरम प्रतिनिधित्व - आकाश!!

तिरुवन्नामलाई कालाहस्ती प्रतिनिधित्व - वायु!!

तिरुवन्नामलाई अरुणाचलेश्वर प्रतिनिधित्व - अग्नि!!

तिरुवनैकवल जम्बुकेश्वरर प्रतिनिधित्व - जल!!

काँची एकम्बरेश्वर प्रतिनिधित्व - पृथ्वी!!

चिदम्बरम मन्दिर अतिप्राचीन तथा पौराणिक महत्व के विशिष्ट मन्दिर हैं।

इस मन्दिर में देवाधिदेव शिव "नटराज" के रूप में और गोविन्दराज "पेरुमल स्वामी" के रूप में पूजे जाते हैं।
यह मन्दिर "शैव" और "वैष्णव" दोनों मतावलंबियों के लिए समान रूप में पूज्यनीय हैं।

मान्यता है कि इस मन्दिर को सर्वप्रथम शिल्पदेव विश्वकर्मा के द्वारा निर्मित हैं।

कालान्तर में इसे पल्लव/चोल साम्राज्य के द्वारा पुनर्निर्माण किया गया।

इस मन्दिर में ग्रेनाइट पत्थर से निर्मित मूर्तियां कितनी जीवंत हैं।

ये मूर्तियां बिना किसी आधुनिक विज्ञान के लेजर कटर और इलेक्ट्रानिक ड्रिलर के सनातनी शिल्पकार ने अपने हाथों से बनाया है।

ध्यान रखें कि MoHs स्केल पर ग्रेनाइट की कठोरता ८ जो सबसे कठोर हीरे १० के पश्चात सर्वाधिक है, तो भी सनातनी शिल्पकारों ने किस विधि से इतनी जीवंत मूर्तियों प्रतिमाओं को गढ़ा होगा, आश्चर्य ही है।

इस मन्दिर में श्री नटराज "आनन्द ताण्डव" में जो सृजनात्मक के प्रतीक हैं (रुद्र ताण्डव संहारक के प्रतीक होते हैं)।

चित्रों को देखें और आनन्द में खो जाएं.!!!

वैभवशाली सनातन विरासत..!!

जय सनातन धर्म🙏🚩

जय महाकाल 🙏🔱🚩

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