सनातन धर्म और हम

परमपिता देवाधिदेव महादेव के शिवालय में शिवलिङ्गम के सामने से भगवान शिव के गण नन्दी महाराज ही अनुपस्थित रहें ऐसा कोई कल्पना कर सकते हैं क्या.??

सामान्य रूप में ऐसा सम्भव नहीं है।

किन्तु आर्यावर्त में एक ऐसा शिव मन्दिर है जहाँ नन्दी महाराज अनुपस्थित हैं।

और इसके पीछे एक अद्भुत सनातनी ऐतिहासिक कथा है।
(वेद/पुराण) उपनिषद में लिखा एक एक शब्द मिथक नहीं सनातनी इतिहास है)

दक्ष प्रजापति के कन्या का विवाह भगवान शिव के साथ सम्पन्न हुआ था।

परन्तु जब भगवान शिव दक्ष प्रजापति के चरण स्पर्श नहीं किए तो दक्ष प्रजापति इसे अपना अपमान समझ बैठे थे।

इससे वे अप्रसन्न थे।

जब दक्ष प्रजापति ने यज्ञ का आयोजन किया तो सभी देवताओं, ऋषियों आदि को तो आमंत्रित किया परन्तु भगवान शिव व माता सती को निमंत्रण पत्र नहीं भेजा गया।

माता सती अपने पति की इच्छा की अवहेलना कर नन्दी महाराज पर सवार होकर अपने पिता के घर यज्ञ स्थल पर गईं।
(भगवान शिव ने माता सती को यज्ञ में जाने से रोका था)

किन्तु वहाँ पिता दक्ष प्रजापति और कुछ कुपात्र लोगों द्वारा अपने पति शिव के होते अपमान को सहन नहीं कर पाईं।

यज्ञ स्थल पर ही देवी सती ने योगाग्नि में आत्मदाह कर लिया।

इसकी सूचना मिलने पर भगवान शिव सती वियोग में कुपित और विह्वल हो गए।

रुद्र अंश से वीरभद्र उत्पन्न हुए और यज्ञ विध्वंस कर दक्ष प्रजापति के सिर को काट कर दण्डित किए।

प्रभु तो कृपानिधान हैं, उनके क्रोध शांत होने पर दक्ष प्रजापति के सिर विहीन देह में बकरे का सिर लगा पुनर्जीवित किया गया।

भगवान शिव के "कोप" को शांत करने हेतु प्रभु श्री हरि विष्णु उन्हें इस स्थान पर लेकर आए थे।

इस स्थान को भगवान शिव के 'कोप" के कारण ही अपवाद रूप में "कोपेश्वर" नामकरण किया गया है।

इस स्थान पर बने मन्दिर को इसीलिए "श्री कोपेश्वर महादेव मन्दिर" कहा जाता है।
(चित्र-साभार)

क्योंकि माता सती नन्दी महाराज पर सवार होकर अपने पिता के घर गईं थीं। जब श्री विष्णु भगवान शिव को यहाँ लाए थे तो वे नन्दी के बिना ही यहाँ आए थे। अतः इस मन्दिर से नन्दी महाराज अनुपस्थित हैं। यहाँ उनका कोई प्रतिमा नहीं है।

इस मन्दिर में भगवान श्री हरि विष्णु शिवलिङ्गम के साथ ही लिङ्ग रूप में स्थापित हैं।

श्री कोपेश्वर महादेव का भव्य मन्दिर  खिदिरपुर, कोल्हापुर जनपद, महाराष्ट्र में स्थित है।

श्री कोपेश्वर मन्दिर का निर्माण शिलाहरा सम्राट गन्दरादित्य के द्वारा करवाया गया था।

श्री कोपेश्वर मन्दिर का निर्माण बारहवीं शताब्दी में ११०९-११८७ के मध्य किया गया था।

श्री कोपेश्वर महादेव मन्दिर महाराष्ट्र और कर्नाटक के सीमा पर है।

श्री कोपेश्वर महादेव मन्दिर सनातनी वास्तुशिल्प का अद्वितीय शिवालय है।

वैभवशाली सनातन धरोहर...!!

जय सनातन धर्म🙏🚩

जय श्रीमन्नारायण🙏🌺

जय महाकाल 🙏🔱🚩
#प्रेमझा

Comments

Popular posts from this blog

सनातन धर्म और हम

सनातन धर्म और हम

सनातन धर्म और हम