सनातन धर्म और हम

एक ओर सनातन धर्म में सृजन, संस्कार, शुचिता, सदाशयता, सहिष्णुता का समावेश है तो वहीं दूसरी ओर म्लेच्छों में विनाश, विखंडन, दुष्कर्म, अत्याचार, हत्या, शत्रुता की प्रधानता है।

आर्यावर्त में चहुँ ओर दृष्टि डालने पर इस विरोधाभाषी लक्षणों को साथ साथ देखा जा सकता है।

यह भग्नावशेष श्री नारँग शिव मन्दिर, कश्मीर का है।

इसके निर्माण में सनातनी पूर्वजों का आस्था, श्रद्धा, समर्पण, परिश्रम और निपुणता लगा हुआ है।

इस मन्दिर के भग्नावशेष ही यह प्रमाणित करने के लिए पर्याप्त है कि अपने यौवनकाल में यह शिव मन्दिर कितना भव्य रहा होगा।

परन्तु, म्लेच्छों ने अपने रक्तजनित विनाशकारी प्रवृत्ति के कारण इस भव्य मन्दिर को नष्ट-भ्रष्ट, अपवित्र और ध्वस्त कर दिया।

आज भी ये भग्नावशेष अपने वैभवशाली अतीत की गाथा सुना रहे हैं।

श्री नारँग शिव मन्दिर अपने जीर्णोद्धार की प्रतीक्षा में है कि कोई पुष्यमित्र, ललितादित्य या राजराजा पुनः इस पवित्र भूमि पर जन्म ले और इसका पुनर्निर्माण कराए।

वैभवशाली सनातन धरोहर के भग्नावशेष...!!

जय सनातन धर्म🙏🚩

जय महाकाल 🙏🔱🚩
#प्रेमझा

Comments

Popular posts from this blog

सनातन धर्म और हम

सनातन धर्म और हम

सनातन धर्म और हम