सनातन धर्म और हम

हमारे सनातनी पूर्वजों द्वारा निर्मित पाषण कलाकृतियों को भरपूर निहार कर अपनी आँखों को बन्द करें, और यह कल्पना करें कि इस निर्माण कार्य के समय उस स्थल पर आप उपस्थित रहे हैं।

अब इस सम्पूर्ण निर्माण कार्य का अवलोकन अपनी कल्पना में करें.!!

क्यों... अचंभित रह गए न...!!

एक बार पूरी गम्भीरता से सनातनी पूर्वजों के कार्य निपुणता, एकाग्रता और उनके समर्पण, त्याग और बलिदान को स्मरण करें।

आपको सनातन संस्कृति की महानता के समक्ष सम्पूर्ण विश्व के प्रसाधन तुच्छ प्रतीत होंगे।

इन्हें सहेजना संवरण करना सनातनियों का परम् कर्तव्य था।

किन्तु "लहरू-गैंग" ने मुर्दा आततायी मुगलों के कब्रों के रखरखाव के लिए जितना धन नष्ट किया उसका दशांश भी इन धरोहरों पर करता तो सम्पूर्ण विश्व में सनातन संस्कृति का डंका बजता।

परन्तु यह सनातन धर्म के मन्दिर रहे हैं इसलिए "(लहरू-गैंग) ने अपने विद्वेष के लिए 'सिकुलरिज्म' का षड्यंत्र रचा और इसे अन्धकार में धकेल दिया।

होयसल नरेश वीर बल्लाल द्वितीय के काल ११९६ ई. में  अमृतेश्वर दण्डनायक के द्वारा इस अतुलनीय मन्दिर का निर्माण किया गया।

श्री अमृतेश्वर मन्दिर चिकमंगलूर, कर्नाटक।

श्री अमृतेश्वर मन्दिर भगवान शिव को समर्पित है।

अमृतेश्वर मन्दिर, अमृतपुर गाँव, चिकमंगलूर जनपद में स्थित है।

इस मन्दिर में अनुपम शिवलिङ्ग स्थापित हैं।

इस मन्दिर में स्थापित नन्दी को देखकर लगता है कि इसे पत्थरों को काटकर नहीं बल्कि पत्थरों को पिघलाकर ढाला गया है।

इसकी सूक्ष्म पाषाण शिल्पकलाकृतियों को देखकर आश्चर्य होता है कि क्या यह निर्माण मानव हाथों से सम्भव है.??

अपने सनातनी मन्दिरों को सरकारी नियंत्रण से मुक्त करवाने के लिए केंद्र सरकार पर दबाव बनाएँ और गुरुकुल परम्परा के पुनर्स्थापना हेतु सहयोग करें.!!

वैभवशाली सनातन धरोहर...!!

जय सनातन धर्म🙏🚩

जय महाकाल 🙏🔱🚩
#प्रेमझा

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