सनातन धर्म और हम
यह सर्वज्ञात है कि वामपंथियों और लहरू के चरण-चाटूकारों ने आर्यावर्त के महान संस्कृति को अपमानित करने के लिए सम्पूर्ण विश्व को 'चिल्ला-चिल्ला' कर बताया कि "इस देश में विदेशी लुटेरे के आक्रमण से पूर्व एक सूई का भी निर्माण नहीं किया जाता था"।
किन्तु यह प्रश्न अनुत्तरित है कि यदि इस देश में एक सूई निर्माण का भी सामर्थ्य और सम्पदा नहीं था तो सबसे पहले विधर्मी म्लेच्छ, पुनः विधर्मी पुर्तगाल, फ्रांसीसी, अंग्रेज लूटेरे इस देश में क्या "मराने व खोदवाने" बारम्बार आता था.???
इस देश के गौरवशाली अतीत के भग्नावशेष भी आजतक लोगों को सम्मोहित कर रहे हैं।
इस अतिदुर्लभ श्री योग लक्ष्मी-नरसिंह स्वामी जी की प्रतिमा को ही देखें, यह प्रतिमा एक ही अखण्ड पाषाण शिला से निर्मित है।(चित्र-साभार)
इस प्रतिमा में प्रयुक्त शिल्प विधा कितना उत्कृष्ठ रहा है की आज सहस्रों वर्ष पश्चात भी यह सनातनी शिल्पकुशलता दर्शनकर्ता को रोमांचित/आह्लादित करता है।
यह अतुलनीय प्रतिमा हम्पी, कर्नाटक में है।
इस प्रतिमा को विधर्मी रेगिस्तानी पशुओं ने सनातन धर्म से अपने जन्मप्रदत्त शत्रुता के कारण १५६५ ई. में क्षतिग्रस्त कर दिया।
हम्पी के भग्नावशेष में आर्यावर्त के गौरवशाली इतिहास की कथा पत्थरों पर अंकित है। इस गौरवगाथा को पढ़ें और उस चमत्कारिक कल्पनाओं में खो जाएँ।
वैभवपूर्ण भग्न सनातन धरोहर...!!
जय सनातन धर्म 🙏🚩
जय श्री लक्ष्मीनरसिंह स्वामी 🙏🌺
जय महाकाल 🙏🔱🚩
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