सनातन धर्म और हम
गर्व करें कि हमारे सनातनी शिल्पकारों को सम्भवतः पाषाण को भी गला कर मूर्ति गढ़ने की कला ज्ञात थी।
अन्यथा जो कलाकृतियाँ मिट्टी या धातु से भी बनाया जाना असम्भव ही है, उन मूर्तियों/प्रतिमाओं/संरचनाओं को भी वे पाषाण से गढ़ कर हमें सौंप गए हैं और जो आज विश्व भर को अपने अनूठे अकल्पनीय निर्माण से चमत्कृत करता रहता है।
मन्दिरों और देव विग्रहों की उत्कृष्टता को छोड़ दें और इन आभूषणों को ध्यान से देखें.!!
क्या आधुनिक शिल्पकला से इसकी प्रतिकृति को धातु या मृदा से भी बनाना सम्भव है.???
ध्यान रहे.!! यह अखण्ड पाषाण शिला के एक ही चट्टान से निर्मित है।
आपका उत्तर "नहीं" में ही होगा।
गौरवान्वित होइए अपने सनातनी पूर्वजों के शिल्प कुशलता पर की उन्होंने इन आभूषणों को पत्थर से गढ़ कर असम्भव को भी सम्भव बना दिए।
यह अतुलनीय आभूषण द्वारपालक मूर्ति का है जो श्री होयसलेश्वर मन्दिर, हलेबिदू, कर्नाटक में है।
(चित्र-साभार)
जब मन्दिर की बाह्य सज्जा ऐसा उत्कृष्ट है तो अपने सम्पूर्ण वैभवशाली काल में यह कितना अकल्पनीय रहा होगा.??
कोटि कोटि नमन है उन अनाम सनातनी पूर्वजों को जिन्होंने सहस्रों वर्ष पूर्व इन्हें निर्माण कर हमें गौरवान्वित होने का अवसर प्रदान किए।
वामपंथियों व लहरू गैंग के कर्णधारों से समकालीन विश्व में इसकी अनुकृति दिखलाने के लिए कहें, उनकी जीभ उत्तर देने में अटक जाएगी।
वैभवपूर्ण सनातन धरोहर...!!
जय सनातन धर्म🙏🚩
जय महाकाल 🙏🔱🚩
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