सनातन धर्म और हम

वामपंथी लुगदी उपन्यास लेखक (कथित इतिहासकार) तथा लहरू गैंग के चरण चाटूकारों ने किस प्रकार षड्यंत्र रच कर सनातनियों का मति हर लिया कि उन्हें अपने गौरवान्वित अतीत का भी भान नहीं रहा....!!

इन "च्यूटीए" ने हमें पढ़ाया की प्रक्षेपास्त्र (मिसाइल) इत्यादि आयुद्ध आधुनिक युग में पश्चिमी देशों ने निर्मित किया है।

उन शठमति, मूढ़मति से इस "मिसाइल और उसके लॉन्चर" की मूर्तियों को दिखा कर यही पूछना है कि "हे वर्णसंकर उत्पादों, यदि मिसाइल पश्चिमी देशों ने आधुनिक समय में बनाया है तो यह मूर्ति सहस्र वर्ष पूर्व ही सनातन धर्म के मन्दिरों में कैसे निर्मित और शोभायमान है.???

यह मिसाइल व लॉन्चर की मूर्ति हलेबिदू मन्दिर, कर्नाटक में है जो सहस्र वर्ष प्राचीन है।

यह मूर्ति ही इस बात का प्रत्यक्ष प्रमाण है कि प्राचीन काल में आर्यावर्त के विज्ञानियों को मिसाइल, लॉन्चर, ज्वलनशील वाणों, लॉन्चिंग पैड इत्यादि की तकनीक को विकसित करने का ज्ञान प्राप्त था और जिसे हमारे ग्रन्थों को चुराकर विदेशियों ने परतंत्रता के समय अपने देश ले जाकर और उस चोरी के ज्ञान का उपयोग करके ही आधुनिक आयुधों का निर्माण किया है।

और कुछ अधम नीच तो आज भी कहता है कि "भारत में गोला-बारूद और तोप म्लेच्छ विधर्मी मुगल लेकर आया था।

अपने वैभवशाली अतीत पर गर्व करें.!!!

गौरवपूर्ण सनातन धरोहर...!!

जय सनातन धर्म🙏🚩

जय महाकाल 🙏🔱🚩
#प्रेमझा

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