सनातन धर्म और हम

महर्षि विश्वामित्र जिनसे मर्यादा पुरुषोत्तम प्रभु श्रीराम ने शिक्षा प्राप्त किए, उन्हें ब्रह्मर्षि कहलाने की अतीव अभिलाषा थी। किन्तु ब्रह्मर्षि वशिष्ठ उन्हें सदैव राजर्षि ही कहते थे।

क्रोध से वशीभूत होकर महर्षि विश्वामित्र ने ब्रह्मर्षि वशिष्ठ की हत्या के लिए एक कटार लेकर ब्रह्मर्षि वशिष्ठ के आश्रम के एक पेड़ पर चढ़ बैठे और उचित समय की प्रतीक्षा करने लगे कि महर्षि वशिष्ठ शिष्यों को विदा कर एकान्त में हों और वे उनकी हत्या कर पाएँ।

वह शरद पूर्णिमा की रात थी और चंद्रमा अपने सोलहों कलाओं से परिपूर्ण हो अपनी छटा बिखरे रहे थे।

शिष्यों ने कहा :- गुरुवर, आज चन्द्रमा कितना सुन्दर दिखाई दे रहा है।

महर्षि वशिष्ठ ने कहा : सौंदर्य देखना हो तो महर्षि विश्वामित्र के मुखमण्डल को देखो जो चन्द्रमा से भी अधिक सौंदर्य पूर्ण हैं। परन्तु उनके क्रोध ने इस सुंदरता पर ग्रहण लगा दिया है।
 यह सुनकर महर्षि विश्वामित्र अवाक रह गए और पेड़ से उतर कर महर्षि वशिष्ठ के चरणों में गिर पड़े। महर्षि वशिष्ठ ने उन्हें पकड़ कर कहा :- "ब्रह्मर्षि विश्वामित्र, उठिये।

महर्षि विश्वामित्र ने कहा ब्रह्मर्षि वशिष्ठ मैं तो आपकी हत्या करने आया था तो आपने मुझे "ब्रह्मर्षि" के सम्बोधन क्यों किया.??

महर्षि वशिष्ठ ने कहा :- आप ज्ञान, विद्वता, तपस्या में सभी महर्षि से श्रेष्ठ रहे हैं। आज अहंकार और क्रोध के तिरोहित होते ही आप "ब्रह्मर्षि" हो गए।

इन्हीं ब्रह्मर्षि विश्वामित्र के नाम पर आर्यावर्त में एक सरिता है "विश्वामित्री नदी" जिनका उद्भव पावागढ़, पंचमहल जनपद, गुजरात है।

विश्वामित्री नदी मुख्यतः वड़ोदरा नगर के पश्चिम में प्रवाहित होती है।

इसी विश्वामित्री नदी के तट पर एक अतिप्राचीन दुर्लभतम शिवालय हैं। (चित्र - साभार)

इस अद्वितीय मन्दिर की प्राचीनता का अनुमान इसी से लगाया जा सकता है कि मन्दिर के छत अब इस पीपल वृक्ष के जड़ों से स्थानांतरित हो गए हैं।

देवाधिदेव महादेव के अनूपम शिवलिङ्ग शिवालय में स्थापित हैं।

यह शिवालय स्वयं ही अद्भुत दृश्य उत्पन्न करते हैं।

अद्भुत सनातन धरोहर...!!

ॐ नमः परम् शिवाय 🚩

जय सनातन धर्म🙏🚩

जय महाकाल 🙏🔱🚩
#प्रेमझा

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