सनातन धर्म और हम

सहस्रों वर्षों तक क्रूर काल के झंझावातों को सहन कर भी अपने सौंदर्य को अक्षुण्ण रखे हुए हैं यह अद्वितीय मूर्ति।

इसके सूक्ष्म से सूक्ष्म कलाकारी भी इन क्रूर मौसम के मार में अपरिवर्तित रहे हैं।

इस मूर्ति के आभूषणों, वस्त्रों और मृदंगम के नयनाभिरामी कलाकृतियों पर ध्यान दें.!

क्या ये मंत्रमुग्ध, चमत्कृत और सम्मोहित नहीं कर रहे हैं.?

इस मूर्ति के भाव भंगिमाएँ कितने जीवन्त और मनमोहक हैं।

इस शिल्पकला को देखकर सनातनी शिल्पकार के सम्मान में मस्तक स्वतः झुक जाता है।

ये अतुलनीय मूर्ति सघन वन के मध्य श्री अन्नपूर्णेश्वरी मन्दिर, मंगलोर, मूदबिदरी, कर्नाटक में स्थित है।

आज के आधुनिक तकनीक के युग में भी क्या मात्र पारिश्रमिक के लिए कोई इसकी प्रतिकृति बना सकते.?

इस प्रकार के निर्माण क्या बिना धर्म के प्रति निष्ठा और समर्पण के बनाया जा सकता है.?

धन्य हैं वो सनातनी पूर्वज जिन्होंने इसे निर्माण किए हैं.!

वैभवशाली सनातन धरोहर...!!

जय सनातन धर्म🙏🚩

जय महाकाल🙏🔱🚩
#प्रेमझा

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