सनातन धर्म और हम
सम्पूर्ण ब्रह्मांड का "सृष्टि, पालन व संहार" जब परमपिता देवाधिदेव महादेव पर ही निर्भर करता है तो जहाँ भी जल-थल-नभ में हाथ डालेंगे उन महेश्वर को ही पाएँगे।
यह अतिदुर्लभ भगवान शिव का "पँचक्रिया" विग्रह सहस्रों वर्ष प्राचीन हैं।
(चित्र-साभार)
इस विग्रह में भगवान महेश्वर के पाँच मुख पाँच क्रियाओं का प्रतिनिधित्व करते हैं :-
१. उत्पत्ति.
२. स्थिति.
३. संहार.
४. तिरोधान.
५. अनुग्रह.
इस अतुलनीय विग्रह की प्राप्ति भी आश्चर्यजनक ही है।
कटनी, मध्यप्रदेश में सेतु निर्माण के लिए नींव की खुदाई की जा रही थी।
भूतल से चालीस फीट अन्दर खुदाई कर्ताओं को अनेक प्राचीन पाषाण मूर्तियों की प्राप्ति हुई।
उन्हीं मूर्तियों में एक यह अतुलनीय पँचक्रिया विग्रह हैं।
सहस्रों वर्ष भूगर्भ में दबे हुए रहने के पश्चात भी इस विग्रह की दिव्य कान्ति से आप सम्मोहित होने से स्वयं को नहीं रोक पाएँगे।
इस विग्रह के जटा, आभूषण, मुखमण्डल, भ्रू, कुंडल आदि के शिल्प शैली पर ध्यान दें.!!
किस अद्भुत निपुणता और प्रवीणता से सनातनी पूर्वजों ने इसे निर्मित किया है कि इतने युगों पश्चात भी विग्रह दर्शनकर्ता से पूछ रहे हैं कि "निर्माण में कोई त्रुटि तो नहीं हुई है ना"...॥
अतुलनीय सनातन धरोहर...!!
ॐ नमः परम् शिवाय 🚩
जय सनातन धर्म🙏🚩
जय महाकाल🙏🔱🚩
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