सनातन धर्म और हम
हिमाचल प्रदेश का अलौकिक प्राकृतिक वातावरण सबों के मन मोह लेता है.!!!
चहुँ ओर प्रकृति का दिव्य सौंदर्य और सुमधुर रागिनियों से निरंतर साक्षात्कार होता रहता है।
ऐसी मान्यता है कि पौराणिक समय में परमपिता देवाधिदेव महादेव भ्रमण करते हुए कुछ समय के लिए इसी हिमाचल प्रदेश के जटोली में आकर निवास किए थे।
कालान्तर में सिद्ध स्वामी कृष्णानन्द परमहँस ने जटोली में आकर यहीं तपश्चर्या किए।
स्वामी कृष्णानन्द परमहँस की प्रेरणा व मार्गदर्शन पर यहाँ एक मन्दिर निर्माण का निर्णय लिया गया।
मन्दिर निर्माण के आरम्भ होने और इसे सम्पूर्णता प्राप्त करने में उनचालीस वर्ष का समय लग गया।
मन्दिर को जैसा स्वामी कृष्णानन्द परमहँस जी का दिशा-निर्देश था, इसे द्रविड़ स्थापत्य शैली में बनाया गया है।
श्री शिव मन्दिर, जटोली, सोलन, हिमाचल प्रदेश, द्रविड़ वस्तुशिल्प का अतुलनीय उदाहरण है।
इस मन्दिर के पत्थरों को थपथपाने पर उससे डमरू सदृश्य ध्वनि उत्पन्न होती है।
इस मन्दिर की ऊँचाई १११ फीट है। सम्भवतः यह एशिया का सबसे ऊँचा शिव मन्दिर है।
यह मन्दिर शिव भक्तों व दर्शनार्थियों के मध्य अतिलोकप्रिय है।
शैव साधक भक्त यहाँ आकर प्रभु महादेव का दर्शन लाभ प्राप्त करते हैं और परमानंद में मग्न रहते हैं।
सौन्दर्यपूर्ण सनातन धरोहर...!!
जय सनातन धर्म🙏🚩
ॐ नमः परम् शिवाय 🚩
जय महाकाल🙏🔱🚩
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