सनातन धर्म और हम

वामपंथी कितना अधम, कितना नीच, कितना घृणित होता है इसके लिए किसी को अब कोई प्रमाण की आवश्यकता ही नहीं होता है।

यह तो पूर्व प्रमाणित सत्य है।

किन्तु आर्यावर्त के वामियों की निकृष्टता तो "लज्जा को भी लज्जित" कर देता है।

किसी भी राष्ट्र के निर्माण में यह अनिवार्य होता है कि वे अपने वर्तमान के अतीत से शिक्षा लेकर ही
भविष्य के वर्तमान का निर्माण करें तो वे सदैव उन्नति के पथ पर चलायमान रहते हैं।

दुर्भाग्यवश आर्यावर्त के कथित इतिहासकार वैश्विक वामपंथी षड्यंत्र में लिप्त होकर यहाँ के गौरवशाली इतिहास को ही मटियामेट कर दिया और यह भी प्रयास किया की लोग वास्तविक इतिहास से कभी परिचित नहीं हो पाए।

परन्तु सत्य को कोई छुपा सकता है क्या.?

सत्य को कभी भी समाप्त नहीं किया जा सकता है।

विश्व के सात आश्चर्य में अत्यंत ही विषम परिस्थिति में एक मात्र तेजोमहालय को स्थान मिला।

जबकि आर्यावर्त में तो हर ओर आश्चर्य ही आश्चर्य बिखरा पड़ा है।

संलग्न छाया चित्र मालादेवी जैन मन्दिर, ग्यारसपुर, विदिशा, मध्यप्रदेश के मार्ग में बने हिंडोला तोरण द्वार का है।

चित्र को zoom करके देखें तो पाएँगे की इसमें श्री हरि विष्णु जी के सभी दशावतारों को कितने अद्भुत अलंकृत रूप से चित्रण किया गया है।

इस मन्दिर में बने ज्यामितीय आकृति, पुष्प-पल्लव, लताएँ इत्यादि इतने उत्कृष्ट रूप से निर्मित है कि देखने वाले इसे निहारते ही रह जाएँगे।

यह मन्दिर सहस्रों वर्ष पूर्ण का बना हुआ है।

मन्दिर तो विधर्मियों के अत्याचार की बलि चढ़ गया है।

अब मात्र तोरण द्वार व मण्डप ही जीर्ण शीर्ण भग्नावशेष के रूप में शेष बचा हुआ है।

किन्तु तोरण और स्तम्भ को देखकर ही यह अनुमान लगाया जा सकता है कि यदि भग्नावशेष इतना अद्वितीय है तो सम्पूर्ण मन्दिर अपने यौवनावस्था में कितना भव्यतापूर्ण रहा होगा।

सनातनी शिल्पकारों के निर्माण के समक्ष विश्व सभी सात आश्चर्य नगण्य ही प्रतीत होते हैं।

नमन है सनातनी पूर्वजों को जिन्होंने अपने समर्पित कला से यह हमारे लिए छोड़ गए जो आज भी गर्व से हमारे मस्तक को ऊँचा कर देते हैं।

गौरवपूर्ण सनातन धरोहर...!!

जय सनातन धर्म🙏🚩

जय महाकाल🙏🔱🚩
#प्रेमझा

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