सनातन धर्म और हम
आज राजनीतिक लाभ के लिए हर दिन किसी न किसी स्थान के नाम बदलने की चर्चा मीडिया में आ ही जाता है।
पर जो कलंक का दाग देश और राज्य पर वास्तव में है उसे कभी नहीं छुआ जाता है।
जैसे अहमदाबाद को कर्णावती करने में दुम दबाए रखा हुआ है।
वैसा ही यह बख्तियारपुर को हाथ लगाने से भी डरता है।
क्या आप जानते हैं..???
नालन्दा विश्वविद्यालय का विराट पुस्तकालय इतना विशाल था कि उसमें नब्बे लाख (९०,००,०००) से अधिक पुस्तकें संग्रहित थीं।
इस पुस्तकालय में वैदिक ज्योतिष, वैदिक गणित, व्याकरण, साहित्य, रसायन शास्त्र, जीवविज्ञान, चिकित्सा शास्त्र इत्यादि के अमूल्य पुस्तकों का अकल्पनीय भण्डार था।
किन्तु ११९३ में अपने जन्मप्रदत्त सनातन धर्म से शत्रुता के कारण विधर्मी म्लेच्छ बख्तियार खिलजी ने इस पुस्तकालय में आग लगा दिया।
उस आग में आचार्यों समेत सभी पुस्तकों की जला कर भस्म कर दिया गया था।
यह विशालकाय पुस्तकालय अनवरत तीन माह से अधिक समय तक जलता रहा।
और इस प्रकार प्राचीन आर्यावर्त के वैभवपूर्ण ज्ञान के भण्डार को नष्ट कर दिया गया।
सबसे बड़ा दुर्भाग्यपूर्ण और पीड़ादायक विडम्बना आज भी क्या है, जानते हैं.?????
वह यह है कि यदि आप नालन्दा विश्विद्यालय के भग्नावशेष देखने जाते हैं तो आप को उसी निर्दयी आक्रांता के नाम पर आज भी चल रहा रेलवे स्टेशन "बख्तियारपुर" ही उतरना पड़ता है।
क्या इससे अधिक लज्जाजनक सनातनियों के आत्मसम्मान के लिए कुछ और हो सकता है.???
और ध्यान रखें .."केंद्र व राज्य में कथित राष्ट्रवादी पार्टी की ही सरकार कई दशकों से रही थी और है"..
अवश्य ही सोचिएगा............
(चित्र - १. वर्तमान भग्नावशेष, २. AI द्वारा बनाया हुआ, साभार)
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