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Showing posts from December, 2024

सनातन धर्म और हम

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जब जब भी प्रभु यशोदानंदन श्री वासुदेव कृष्ण की चर्चा होती है तो श्री राधा रानी जी और श्री मीराबाई जी की चर्चा अनिवार्य रूप से होती ही है। श्री कृष्ण भक्त मीराबाई जी का सनातन संस्कृति में अपना अद्भुत योगदान और विशिष्ट पहचान है। मीराबाई जी मेवाड़ में ६०० वर्ष पूर्व भगवान श्री कृष्ण के जिस विग्रह की पूजा करती थीं.. इस मन्दिर में प्रभु श्री कृष्ण के वही विग्रह स्थापित हैं। श्री मीराबाई मन्दिर, मेड़ता, राजस्थान। इस मूर्ति को आमेर के शासकों ने दुर्दांत अत्याचारी म्लेच्छ मुगलों से युद्ध करके बचाया था। मन्दिर का निर्माण महाराजा मानसिंह प्रथम की पत्नी महारानी कनखावती जी ने करवाया था। इस मन्दिर का वास्तुशिल्प मन को चमत्कारिक रूप से सम्मोहित कर लेता है। (चित्र - साभार) इसे दर्शन करें और श्री कृष्ण भाव सरिता में आनंदपूर्ण गोते लगाएं। अतुलनीय सनातन धरोहर...!! म्हारे तो गिरधर गोपाल दूसरो न कोई 🌺❤️🚩 जय सनातन धर्म 🙏🚩 जय प्रेम पुजारिन मीरा बाई जी 🙏🌺 जय श्री गिरधर गोपाल जी🙏🌷🚩 जय महाकाल 🙏🌺🚩 #प्रेमझा

सनातन धर्म और हम

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कथित स्वतंत्रता प्राप्ति के साथ ही हमारे शिक्षा व्यवस्था में ही चूक रहा है कि हमारे पाठ्यक्रम में हमारे सनातनी विरासत को सम्मिलित/समाहित नहीं किया गया। वामियों, लिब्राण्डों, कांगियों ने जैसा कल्पित कहानी इतिहास के पुस्तकों में पढ़ाया, हमने उसे ही प्रामाणिक मान लिया। और इन सनातन द्रोही गैंग ने कहा कि विधर्मी म्लेच्छों के आर्यावर्त में आक्रमण कर आने से पूर्व यहाँ एक "सूई" भी नहीं बनता था। उस द्रोही गैंग से प्रश्न है कि यह भी बताओ कि इस शिला-सुन्दरी के समान कोई निर्माण समकालीन विधर्मी म्लेच्छों के देश में एक भी है क्या.?? यदि नहीं है तो उसने ऐसा निर्माण अपने देश में क्यों नहीं किया.?? कभी एकांत में अवश्य ही चिंतन करें कि क्या कोई दस्यू गैंग जो समृद्धि को लूटने ही आया हो वह कोई सकारात्मक निर्माण कर सकता है क्या?? ये सनातनी शिल्पकार के कला निपुण हाथों का चमत्कार है जो यह पाषण शिला भी जीवन्त हो मधुर स्वर-लहरियों को सहस्रों वर्ष उपरान्त आज भी सुना रहा है। यह शिला-सुन्दरी चोल शासकों द्वारा निर्मित मन्दिर में स्थित है जिसे विजयनगर साम्राज्य के काल में निर्मित किया गया है। ध्यान रखें, व...

सनातन धर्म और हम

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दुर्भाग्य का स्मारक...........!?! (फतेहपुर सीकरी) फतेहपुर सीकरी का यह विशाल किला "सकरवार क्षत्रिय राजाओं" का था। बर्बर म्लेच्छ विधर्मी आक्रांता बाबर के हमलों से षड्यंत्र द्वारा पराजित होने के पश्चात ये पूर्व की ओर प्रस्थान कर गए। आज भी बड़ी संख्या में बिहार के विभिन्न स्थानों पर सकरवार राजपूत व भूमिहार पाये जाते हैं। यहाँ सनातन की कलाकृतियों का अद्भुत दृश्य देखने को मिलता है। जो विधर्मी केवल विध्वंस जानता है, उन मुगलों ने अधिकार करने के पश्चात उसमें कुछ निर्माण तो नहीं किया अपितु जो देवी देवताओं की मूर्तियाँ थीं सब नष्ट कर दिया। किले के अंदर मस्जिद, मजार का निर्माण जो किया गया है उसमें अंतर आज भी स्पष्ट दिखाई देता है। कई स्थानों पर श्री हनुमान जी का चित्र अब भी मिलता है ध्यान से देखने पर बहुत से देवताओं की मूर्तियां झलकती है। यहीं बगल में खानवा का युद्ध "महाराणा सांगा" व बाबर के बीच हुआ था। विजेता राणा सांगा का साम्राज्य अफगानिस्तान से गुजरात मालवा क्षेत्र तक फैला था। सीकरी गढ़ के बगल में ही खानवा पहाड़ पर विजय स्तम्भ के रूप में महान "राणा सांगा" का स्मारक गर...