सनातन धर्म और हम

कथित स्वतंत्रता प्राप्ति के साथ ही हमारे शिक्षा व्यवस्था में ही चूक रहा है कि हमारे पाठ्यक्रम में हमारे सनातनी विरासत को सम्मिलित/समाहित नहीं किया गया।

वामियों, लिब्राण्डों, कांगियों ने जैसा कल्पित कहानी इतिहास के पुस्तकों में पढ़ाया, हमने उसे ही प्रामाणिक मान लिया।

और इन सनातन द्रोही गैंग ने कहा कि विधर्मी म्लेच्छों के आर्यावर्त में आक्रमण कर आने से पूर्व यहाँ एक "सूई" भी नहीं बनता था।

उस द्रोही गैंग से प्रश्न है कि यह भी बताओ कि इस शिला-सुन्दरी के समान कोई निर्माण समकालीन विधर्मी म्लेच्छों के देश में एक भी है क्या.??

यदि नहीं है तो उसने ऐसा निर्माण अपने देश में क्यों नहीं किया.??

कभी एकांत में अवश्य ही चिंतन करें कि क्या कोई दस्यू गैंग जो समृद्धि को लूटने ही आया हो वह कोई सकारात्मक निर्माण कर सकता है क्या??

ये सनातनी शिल्पकार के कला निपुण हाथों का चमत्कार है जो यह पाषण शिला भी जीवन्त हो मधुर स्वर-लहरियों को सहस्रों वर्ष उपरान्त आज भी सुना रहा है।

यह शिला-सुन्दरी चोल शासकों द्वारा निर्मित मन्दिर में स्थित है जिसे विजयनगर साम्राज्य के काल में निर्मित किया गया है।

ध्यान रखें, विजयनगर साम्राज्य समकालीन विश्व के सबसे समृद्ध राज शासन रहे हैं।

यह जीवन्त शिला-सुन्दरी प्रतिमा, कोलरम्मा मन्दिर, कोलार, कर्नाटक में स्थित है।
(चित्र-साभार)

सनातनी शिल्पकारों ने इसके निर्माण में सम्पूर्णता प्रदान करने के लिए अपने पूर्ण कला को ही उड़ेल दिया है।

इस मूर्ति के परिधान व आभूषणों को ध्यान से देखें.!!

सूक्ष्म से सूक्ष्म अवयवों तक को पूरी स्पष्टता से उकेरा गया है।

सुन्दरी के अंग-विन्यास व कमनीयता सम्मोहित कर रहे हैं।

सनातनी पूर्वजों को उनके उत्कृष्ट कला के लिए बारम्बार नमन है।

सौन्दर्यपूर्ण सनातन धरोहर...!!

जय सनातन धर्म🙏🌹

जय महाकाल 🙏🔱🚩
#प्रेमझा

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