सनातन धर्म और हम
शिल्प कला में निपुणता, पारंगतता, उत्कृष्टता, संपूर्णता क्या होती है यह इस नृत्य-मुकुट में परिलक्षित हो रहा है।
बिना अखण्ड समर्पण और एकाग्रता और भक्ति भाव के यह निर्माण असंभव सा प्रतीत होता है।
मुखाकृति के ऊपर व नीचे बने नाग-बंध पर ध्यान दें....
कितना अद्भुत दृश्य निखर उठा है.!!
नृत्य मुकुट का एक एक ईंच सनातन शिल्पकार के शिल्प विधा को धन्य धन्य कह रहा है।
नृत्य-मुकुट (केरल) ....!!!
वैभवशाली सनातन धरोहर...!!
जय सनातन धर्म 🙏🚩
जय महाकाल 🙏🔱🚩
Comments
Post a Comment