सनातन धर्म और हम

जब कोई शिल्पकार अनगढ़ पत्थर को काट कूट कर अपने कल्पना को मूर्त रूप देता है और "मूर्ति" का निर्माण होता है।

परंतु जब कोई भक्त अपने आराध्य देव की भक्ति में उच्चतम स्तर पर होता है तो देव प्रेरणा से "विग्रह" का निर्माण स्वत: हो जाता है।

भक्त को कुछ कल्पना करने की आवश्यकता ही नहीं होता है।

और इस प्रकार जो भी निर्मित होता है वह अद्भुत, दुर्लभतम, अतुलनीय और अकल्पनीय ही होता है।

मूर्ति तो निर्जिव होती है किन्तु विग्रह सजीव होते हैं क्योंकि वे प्राणप्रतिष्ठित होते हैं।

इस अद्भुत शिवलिङ्ग को ही देखें...!!

यह अप्रतिम शिवलिङ्ग उत्तर प्रदेश के सोनभद्र जनपद में अवस्थित है।

भवानीगांव में फुलमती भवानी के सरोवर पर यह अद्भुत शिवलिङ्ग विराजमान हैं। (चित्र - साभार)

इस शिवलिङ्ग में कितनी विलक्षणता एक साथ समाहित हैं।

इस अनुपम शिवलिङ्ग में देवी की मुखाकृति, नाग, 
जल- लहरी (अरघा) सभी अपने आप में अनूठा है।

इन्हें जिन सनातनी शिव भक्त ने बनाया होगा उनके अहोभाव के स्तर को सोचकर ही रोमांच होता है।

इस शिवलिङ्ग के लिए तो सम्पूर्ण ब्रह्माण्ड ही शिवालय हो गया है।

यहां शिव भक्त अपने भाव को अर्पण करने के आराध्य देव के आते हैं।

अतुलनीय सनातन धरोहर...!!

जय सनातन धर्म 🙏🚩

जय महाकाल 🙏🌺🚩
#प्रेमझा

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