सनातन धर्म और हम

आज यदि कोई पादुका (जूते-चप्पल) क्रय करने की सोचता है तो सर्व प्रथम उनको RED TAPE, RED CHIEF, WOODLANDS, LIBERTY इत्यादि कम्पनियों का ही विचार आता है, क्योंकि उन्हें लगता है कि इन कम्पनियों के उत्पाद नवोन्मेष में उत्कृष्टता लिए होते हैं।

परन्तु, क्या हम कभी एक क्षण को यह सोचते हैं कि जिन्हें वे नवोन्मेषी कहते हैं और जिनके लिए वे "पेटेंट" ले लेते हैं उनमें से बहुतेरे उत्पाद "सनातनी कृति चौर्य" के द्वारा बनाए गए होते हैं।

संलग्न चित्रों को ध्यान से देखें....!!
(चित्र-साभार)

ये मूर्तियाँ सहस्रों वर्ष पूर्व ही सनातनी मन्दिरों में बनाए गए हैं। और यदि ये पादुका मूर्तियों में निर्मित हैं तो उस काल के समाज में भी इसका उपयोग तो अवश्य ही रहा होगा।

इन मूर्तियों के पादुकाओं में जो "DESIGN" हैं उसी की अनुकृति आज की आधुनिक कम्पनियाँ अपने उत्पाद के रूप में विपणन करते हैं और हमलोग उसी उत्पाद को "latest trend" मान कर प्रफुल्लित होकर क्रय करते हैं।

जबकि इस जैसे उत्पाद सहस्रों वर्ष पूर्व ही सनातनी चर्मकारों ने निर्मित कर दिया था।

अब यह कैसे मान लूँ कि "लुटेरे म्लेच्छों, मुगलों और पुर्तगालियों, फ्रांसिसियों, अंग्रेजों के लूट से पहले इस महान देश में "सूई" भी नहीं बनता था..!!"

अपने सनातन संस्कृति/परम्परा पर गौरवान्वित हैं।

पुनः वही गौरव प्राप्त करने के लिए सभी सनातनी संगठित होकर "सभी मन्दिरों को सरकारी नियंत्रण से मुक्त करवाने के लिए प्रयास करें.!"

क्योंकि यदि मन्दिर की नियंत्रण मुक्ति हो गई तो पुनः प्राचीन पद्धति से मन्दिरों में "गुरुकुल" स्थापना सम्भव होंगे।

नवोन्मेषण और अनुसन्धान के प्रमुख केन्द्र हमारे वैदिक गुरुकुल ही रहे हैं।

वैदिक गुरुकुल ही आर्यावर्त को विश्वगुरु के रूप में पुनर्प्रतिष्ठित करेंगे.!!

वैभवशाली सनातन धरोहर...!!

जय सनातन धर्म🙏🚩

जय महाकाल🙏🔱🚩
#प्रेमझा

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