सनातन धर्म और हम
किसी राष्ट्र को अंदर से घुन खाए लकड़ी के जैसा निर्बल और नष्ट करना हो तो उसके इतिहास को मटियामेट कर दो।
यही सबसे अधिक प्रभावी रणनीति होती है।
आर्यावर्त भरतखण्ड के शौर्य पराक्रम भाव को समाप्त करने हेतु सिकुलर/लिब्रांड/वामी/कांगी गैंग ने यही किया।
इस गैंग ने इतिहास में इतना मिलावट किया कि उसे गल्प-साहित्य या लुगदी-उपन्यास जैसा बनाकर रख छोड़ा।
हमारा वैभवशाली इतिहास यह है कि.....
चोलों ने २१०० वर्ष राज किया.!
चालुक्यों ने ७०० वर्ष राज किया.!
पांड्यों ने ८०० वर्ष राज किया.!
सातवाहनों ने ५००वर्ष राज किया.!
अहोम राजवंश ने ७०० वर्ष राज किया.!
पल्लवों ने ६०० वर्ष राज किया.!
चंदेलों ने ४०० वर्ष राज किया.!
राष्ट्रकूटों ने ५०० वर्ष राज किया.!
मौर्य वंश ने ५५० वर्ष राज किया.!
गुप्त वंश ने ४०० वर्ष राज किया.!
और विधर्मी मलेच्छ मुगलों ने मात्र २०० वर्ष राज किया.!
(सम्पूर्ण देश पर एक साथ इन मलेच्छों का राज मात्र इतना ही रहा है)
इसके अतिरिक्त शुंग राजवंश, नंद राजवंश, कुषाण आदि अनेक राजवंशों की बात छोड़ भी दें तो इस सत्य को कोई झुठला नहीं सकता है।
पर विडम्बना है कि हमारे (कथित) इतिहास की पुस्तकों में वैभवशाली मन्दिरों/राज प्रासादों/ भवनों और उन्हें बनाने वाले महान शासकों के बारे में कोई चर्चा तक नहीं है।
वहीं १२५००० मन्दिरों से भी अधिक को नष्ट - भ्रष्ट, छिन्न - भिन्न, अपवित्र कर तोड़ने वाले मलेच्छ मुगलों की महानता के झूठे गौरवगान से आखिरी पन्ना भी अछूता नहीं है।
यहां तक कि जिन मलेच्छों ने अपने देश में १९३० तक (कच्चा तेल, पैट्रोलियम खोज होने तक) कोई भी पाषाण निमार्ण कार्य नहीं किया उसे कीर्ति मुकुट पहनाने के लिए वास्तुकला में "मुगल शैली" जैसा नामकरण तक कर दिया।
मलेच्छों के इस आर्यावर्त भरतखण्ड भूमि पर पैर रखने से सहस्रों वर्ष पूर्व बने इन सनातनी मन्दिरों को zoom करके देखें.!!
आपको क्या लगता है कि इसके समकालीन विश्व भर के किसी भी देश में इसके समतुल्य कोई भी "वास्तु शिल्प का निमार्ण" कोई भी व्यक्ति दिखा सकता है.??
इन सभी प्रत्यक्ष प्रमाणों के होने पर भी इस देश को जंगली और संपेरों का देश कहा गया।
क्या यह दुर्भाग्यपूर्ण विडंबना नहीं है.??
क्या इन और इन जैसे ही असंख्य मन्दिरों/मूर्तियों/प्रतिमाओं का एक एक ईंच चीख - चीख कर सनातनी शिल्प कला और वास्तुकला की श्रेष्ठता, निपुणता, उत्कृष्टता, संपूर्णता को प्रमाणित नहीं कर रहा है.?? (सभी चित्र - साभार)
धन्य धन्य हैं वे सनातनी पूर्वज जिन्होंने इसका निर्माण किया और वे शासक जिन्होंने इसका निर्माण कराया और इसके निर्माणकर्ता को संरक्षण दिया.!
आईए लौटें शुद्ध सनातन धर्म संस्कृति परंपरा की ओर.!!!
अकल्पनीय अद्वितीय सनातन धरोहर...!!
जय सनातन धर्म 🙏🚩
जय महाकाल 🙏🌺🚩
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