सनातन धर्म और हम
भक्त एवं कवि सूरदास जी दृष्टिहीन थे परन्तु श्री नटवरलाल बांकेबिहार जी की भक्ति में अपने प्रज्ञा-चक्षु से देखकर लीलामाधव के बालपन का जो वर्णन किए हैं वह अद्भुत है।
जब कोई प्रभु के भावनामृत का पान कर लेते हैं तो ऐसा ही भक्ति में डूबे भक्तों के संग होता है।
जब भक्त अपने आराध्य देव की भक्ति के उच्चतम स्तर पर पहुँचते हैं तो अपने भक्ति-भाव से उनके अनुपम रूप गढ़ते हैं।
यह दुर्लभतम विग्रह श्री नरसिंह स्वामी जी का है जिसमें वे "बाल-रूप" में हैं।
(चित्र-साभार)
जिस प्रकार यशोदानन्दन को मक्खन अतिप्रिय है, इस विग्रह में भी बाल नरसिंह स्वामी के एक हाथ में मक्खन की कटोरी और दूसरे हाथ में मक्खन का गोला का दर्शाया गया है।
ये मनमोहक विग्रह मृगावधे, तीर्थहल्ली तालुका, शिवमोगा जनपद, कर्नाटक में स्थापित हैं।
भक्ति-भाव का एक अद्वितीय सनातन धरोहर...!!
ॐ नमो नारायणाय 🚩
जय सनातन धर्म🙏🚩
जय नरसिंह स्वामी 🙏🌺
जय महाकाल 🙏🔱🚩
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