सनातन धर्म और हम

ये नर्तकियों की जीवन्त मूर्तियाँ श्री लिङ्गराज मन्दिर, भुवनेश्वर, ओडिशा में निर्मित हैं। (चित्र - साभार)

श्री लिङ्गराज मन्दिर देवाधिदेव महादेव को समर्पित हैं।

इस मन्दिर के विशालकाय शिवलिङ्गम अपने आप में सम्पूर्ण और अद्वितीय हैं।

इस मन्दिर का निर्माण नौवीं सदी में हुआ है परंतु आज भी इसके अद्भुत निर्माण को देखें तो सम्मोहित हो जाएंगे।

इन नर्तकियों की मूर्तियों के आभूषणों, जीवंत भाव-भंगिमाएँ उत्कृष्ट पाषाण शिल्पकला के अनूठे नमूने हैं।

हमारे प्राचीन मन्दिर केवल आराधना/पूजन स्थल ही नहीं थे।

ये मनुष्य के सर्वांगीण विकास के सर्वोच्च स्थल रहे थे।

यहाँ वैदिक ज्ञान, व्याकरण, संस्कृत, तकनीकी, शिल्पकला, वास्तुकला, आयुर्वेद, शल्यक्रिया इत्यादि के पठन-पाठन, अनुसंधान के सर्वोच्च संस्थान थे।

परंतु दुर्भाग्यवश विधर्मी आक्रांताओं/यवनों और आधुनिक सिकुलर सरकार वाली व्यवस्था ने मन्दिरों के सभी सनातन व्यवस्था को विनष्ट कर सनातन ज्ञान परम्पराओं को समाप्त कर दिया।

स्वतंत्र भारत में भी सभी मन्दिरों पर अवैध अधिग्रहण कर इसे मृतप्राय कर दिया है।

अब तो कोई पुष्यमित्र शुंग ही अवतार लेकर पुनः सनातन शिक्षण व्यवस्था को पुनर्स्थापित कर सकते हैं।

इन मन्दिरों को देखकर वैभवशाली सनातन संस्कृति पर गर्व होता है।

अतुलनीय सनातन धरोहर...!!

ॐ नमः परम् शिवाय 🚩

जय सनातन धर्म🙏🚩

जय महाकाल🙏🔱🚩
#प्रेमझा

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