सनातन धर्म और हम
वैदिक काल में हमारे सनातनी मनीषियों, ऋषियों को सम्पूर्ण ब्रह्माण्ड, सौर-मंडल, पृथ्वी के घुर्णन गति, ग्रहों के परिभ्रमण पथ और समय का कितना विस्तृत ज्ञान था, इसका एक आदर्श उदाहरण देखिए..!!
श्री विद्याशंकर मन्दिर, श्रीरंगम, चिकमंगलूर जनपद, कर्णाटक।
(चित्र - साभार)
इस मन्दिर के भीतर बारह स्तम्भ हैं।
ये बारह स्तम्भ वर्ष के बारह हिन्दू माह का प्रतिनिधित्व करते हैं।
प्रातः सूर्योदय के समय जो भी हिन्दू माह होता है उसी स्तम्भ पर सूर्य की पहली किरण पड़ती है।
यह निर्माण सहस्रों वर्ष पूर्व ही हमारे सनातनी पूर्वजों के हाथों हुआ है।
क्या कोई वामी/कांगी समकालीन विश्व के किसी अन्य देशों में कोई ऐसा दुर्लभ निर्माण दिखा सकता है.??
परन्तु आर्यावर्त और सनातनी लोगों का दुर्भाग्य देखिए कि हमें एफिल टॉवर, मोनालिसा, पीसा का मीनार तो पढ़ाया जाता, बस ऐसे गौरवशाली शिल्पकला के विषय में आज भी हमें पढाया नहीं जाता है।
धन्य धन्य हैं हमारे सनातनी पूर्वज जिन्होंने ऐसे अद्भुत मन्दिरों को बनाए.!!
अतुलनीय सनातन धरोहर...!!
जय सनातन धर्म🙏🚩
जय महाकाल🙏🔱🚩
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