सनातन धर्म और हम
यह प्राचीन, अप्रतिम, अनुपम शिवलिङ्गम अपने में आर्यावर्त का गौरवशाली इतिहास समेटे हुए हैं.!!
यह मनोरम शिवलिङ्गम कुम्भलगढ़ किला, कुम्भलगढ़, राजस्थान में स्थापित है। (चित्र – साभार)
इस शिवलिङ्गम की स्थापना का श्रेय महाराणा कुम्भा को जाता है।
महाराणा कुम्भा राणा मोकल सिंह और सौभाग्य देवी (जैतमाल परमार की पुत्री) के पुत्र थे।
महाराणा कुम्भा ४८वें राणा रहे और इनका शासन १४३३ से १४६८ ई. तक रहा।
इन्होंने राज की बागडोर अपने पिता महाराज राणा मोकल सिंह से प्राप्त किया था।
मेवाड़ के सिसोदिया साम्राज्य में राणा कुम्भा का अद्वितीय स्थान है।
राणा कुम्भा ने कुम्भलगढ़ किला का निर्माण करवाया था।
कुम्भलगढ़ किला ही वह स्थान है जहाँ महाराणा प्रताप सिंह सिसोदिया का जन्म हुआ था।
इन्हें लोग महाराणा प्रताप या मेवाड़ी राणा के प्रचलित नामों से पुकारते हैं।
महाराणा प्रताप का जन्म ज्येष्ठ शुक्ल तृतीया तिथि विक्रम संवत १५९७ तदनुसार ९ मई १५४० ई. को हुआ था।
महाराणा प्रताप राणा उदय सिंह (द्वितीय) और जयवंती देवी के पुत्र थे।
महाराणा प्रताप की अर्धांगिनी देवी अजबरे पुनवार भी दृढ़ इच्छाशक्ति की महिला थी।
महाराणा प्रताप ने हल्दीघाटी युद्ध (१५७६ ई.) में विधर्मी म्लेच्छ मुगल अकबर का नाक धरती पर रगड़ पराजित किए थे।
सिसोदिया राजपूत देवाधिदेव महादेव और माता भवानी के अनन्य भक्त थे।
भगवान शिव उनके इष्टदेव रहे हैं।
इस अद्भुत शिवलिङ्गम का पूजन अर्चन सिसोदिया राणाओं के द्वारा होता रहा है।
वैभवशाली सनातन धरोहर...!!
जय सनातन धर्म🙏🚩
जय भवानी 🙏🌺
जय महाकाल 🙏🔱🚩
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