सनातन धर्म और हम
यह सर्वज्ञात कथा है कि दक्ष प्रजापति यज्ञ का आयोजन करते हैं और द्वेष से देवाधिदेव महादेव को निमंत्रण नहीं देते हैं।
माता सती भगवान शिव के विचारों के विरुद्ध जाकर नन्दी महाराज पर सवार होकर यज्ञ स्थल पर आती हैं।
वहाँ अपने पति का अपमान होता देख वे यज्ञकुण्ड में कूद कर प्राण त्याग देती हैं।
रूद्र के अंश देव वीरभद्र यज्ञ विध्वंस कर दक्ष प्रजापति के सिर को काट लेते हैं।
परम् पिता भोलेनाथ सती के वियोग में विह्वल हो उनके निष्प्राण देह को लेकर रूद्र ताण्डव करने लगे।
सम्पूर्ण ब्रह्माण्ड त्राहिमाम करने लगा।
सृष्टि के रक्षार्थ श्री हरि नारायण ने अपने सुदर्शन चक्र से देवी सती के निष्प्राण देह को काट कर खण्ड खण्ड कर दिया।
जहाँ जहाँ देवी सती के खण्डित अङ्ग गिरे वहाँ पर शक्तिपीठ हैं। (कुल ५१ इक्यावन हैं)।
ऐसी मान्यता है कि चंडिका स्थान पर माता सती का बायाँ नेत्र यहाँ गिरा था।
एक अन्य कथा है कि अंगराज कर्ण अपने दान के लिए विख्यात रहे।
वे मुद्गलपुरी वर्तमान समय में मुंगेर, बिहार में अपनी राजधानी बनाए थे।
उनके राजमहल को कर्णचौरा के नाम से जाना जाता है।
वर्तमान समय में उसी स्थान पर स्वामी सत्यानंद द्वारा स्थपित इंटरनेशनल योग सेंटर है।
ऐसी मान्यता है कि राधेय कर्ण प्रतिदिन ब्रह्म मुहूर्त में उत्तरवाहिनी माँ गङ्गा के घाट कष्टहरिणी पर गङ्गा स्नान कर माँ चंडिका को प्रसन्न करने हेतु अपने देह पर औषधीय वनस्पतियों का लेपन कर उबलते हुए तेल के कड़ाहे में प्रवेश करते थे। योगनियाँ उनका भक्षण करती थीं और पुनः माँ चंडिका उन्हें जीवन दान दे जीवित कर सवा मन स्वर्ण प्रदान करती थीं जिन्हें कर्ण प्रतिदिन भोर में दान करता था।
एक बार एक राजा सेवक बनकर कर्ण के साथ रहकर इस भेद को जान गया और कर्ण से पहले ही गङ्गा स्नान कर उस तेल के कड़ाहे में कूद गया और माँ चंडिका से स्वर्ण ले गया।
अपने नियत समय पर कर्ण जब स्नान करके कड़ाहे में प्रवेश करने लगा तो उन्हें आकाशवाणी हुई कि स्वर्ण तो वह ले जा चुका है तो आज दुबारा आगमन क्यों.??
और वह कड़ाहा पलट गया।
आज भी वह पलटा हुआ पाषाण कड़ाहा देखा जा सकता है।
माँ चंडिका नेत्र के रूप में पिंडी पर विराजमान हैं।
इस खोह में दीपक जलने से जो इस पलटे हुए कड़ाहे पर काजल बनता है उसे भक्त बड़ी ही श्रद्धा व आस्था से ले जाते हैं।
ऐसी मान्यता है कि इस अञ्जन को आँखों में लगाने से नेत्र ज्योति बढ़ती है।
शारदीय नवरात्र में यहाँ भक्तों की भीड़ लगी रहती है।
माँ चंडिका शक्तिपीठ, मुंगेर नगर, मुंगेर जनपद बिहार में स्थित है। (चित्र - साभार)
यहाँ सभी सनातनी भक्तों की सकल मनोकामना पूर्ति होती है।
दर्शनीय सनातन धरोहर...!!
जय सनातन धर्म 🙏🚩
जय जय माँ चंडिका 🙏🌺
जय महाकाल 🙏🌺🚩
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