सनातन धर्म और हम
आप विश्व के सभी सातों "आश्चर्य (WONDER)" को तराजू के एक पलड़े पर रखें और दूसरी ओर पलड़े पर केवल इस मन्दिर को रखें तो भी इस मन्दिर वाला पलड़ा झुका हुआ मिलेगा।
ये हैं बृहदेश्वर मन्दिर, तंजावुर, तमिलनाडु।
यह विशाल मन्दिर ग्यारहवीं शताब्दी का निर्माण है।
आप यह जानकर रोमांच से भर जाएँगे की इस मन्दिर में सीमेंट या अन्य कोई "एडहेसिव" का प्रयोग पत्थरों को जोड़ने के लिए नहीं किया गया है।
सम्पूर्ण मन्दिर "इंटरलॉकिंग" प्रणाली के द्वारा शिला-खण्डों को जोड़कर निर्मित है।
सहस्रों वर्ष पूर्व बने इस मन्दिर में आजतक कोई अन्तर नहीं आया है।
इस मन्दिर ने कई भूकम्प, प्रलय, प्राकृतिक आपदाओं ऐसे ही हँसते हुए सहा है और अटल खड़ा है।
इसके ८० टन के विमान को शिखर पर कैसे चढ़ाया गया है यह आज भी विज्ञानियों के रहस्य ही है।
इसके वृहताकार नन्दी काले ग्रेनाइट के एक ही शिला खण्ड से निर्मित है।
और इस विशाल बृहद नन्दी महाराज के बारे में आप ही कुछ कहें.!!
यह चोलकाल का द्रविड़ स्थापत्य शैली का अद्भुत निर्माण है।
ग्रेनाइट पत्थर से बना हुआ यह विश्व का इतना विशाल संभवतः प्रथम मन्दिर है।
इस मन्दिर में गर्भगृह के ऊपर तेरह तलों का विशाल विमान है।
इस मन्दिर में चौदह आयतों के ऊपर अस्सी टन का भारी गुम्बज स्थापित है।
इस मन्दिर का शिखर व गुम्बज इस प्रकार बनाया गया कि किसी भी समय किसी भी स्थिति में इसकी छाया नहीं बनती है।
इस मन्दिर को पेरुवुदैयार कोविल तथा राजराजेश्वरम के नाम से भी जाना जाता है।
इसे दक्षिणा मेरु अर्थात दक्षिण का मेरु भी कहा जाता है।
अपने सनातनी पूर्वजों के कला-निपुणता को सोचकर ही सिर गर्व से ऊँचा हो जाता है। (चित्र – साभार)
नमन है उन महान पूर्वजों को जिन्होंने इस गौरवशाली समृद्ध विरासत को बनाकर अपने वंशजों के लिए छोड़ गए हैं।
जय सनातन धर्म🙏🚩
जय महाकाल 🙏🔱🚩
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