सनातन धर्म और हम
आर्यावर्त में अनेक राजकोष रहे थे जिन्हें विधर्मी आक्रांताओं ने लूट लिया था।
परन्तु उन्हीं में एक ऐसा भी गुप्त राजकोष रहा है जिसे कोई भी विदेशी नहीं लूट नहीं पाया।
क्या आप उसे जानते हैं???
वह गुप्त राजकोष "सोन भण्डार" गुफा के नाम से जाना जाता है।
सोन भण्डार गुफा बिहार के राजगीर, नालन्दा में स्थित है।
(चित्र - साभार)
सोन भण्डार गुफा का इतिहास हर्यक वंश (५४४ - ४९२ ई.पू.) के शासक बिम्बिसार से जुड़ा है। बिम्बिसार ने अपने शासनकाल में एक बड़े पहाड़ को काटकर उसमें कृत्रिम गुफा का निर्माण कराया था। उस गुफा में अपने बहुमूल्य संपदाओं को छुपा कर रख दिया था। इस गुफा का नाम सोन भण्डार पड़ा था।
इस गुफा में दो कोठरी बनवाया गया था। एक में धन सम्पदा (स्वर्ण/माणिक्य आदि) रखा गया था और दूसरे कोठरी में उसकी सुरक्षा करने हेतु सैनिकों के रहने की व्यवस्था थी।
इस गुफा को एक विशाल पाषाण खण्ड से ढंक दिया गया था।
फिरंगी अंग्रेज़ों ने परतंत्रता के समय इस सोन भण्डार को खोलने के लिए इस पर तोप के गोले दागे थे। तोप दागने के चिह्न आज भी यहाँ विद्यमान हैं और उसे देखे जा सकते हैं।
पर अंग्रेज लाख प्रयास के पाश्चात्य भी इसे खोलने में विफल रहे।
आज भी यह सोन भण्डार अपने साथ रहस्य समेटे हुए वैसे ही खड़ा है।
पर्यटक इसे देखने आते रहते हैं।
रहस्यमय सनातन धरोहर...!!
जय सनातन धर्म 🙏 🚩
जय महाकाल 🙏🌺🚩
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