सनातन धर्म और हम
भक्ति भी कला से मिलकर क्या - क्या रंग दिखाती है...!!!
यशोदानंदन, नंदलाला, घनश्याम की यह एक अति दुर्लभतम मूर्ति है।
यहां श्री हरि नारायण के पूर्णावतार श्री कृष्ण कन्हैया अष्टभुजाधारी हैं।
आश्चर्यजनक रूप से अष्टभुजा होने पर भी द्वि-पाद ही हैं।
कन्हैया के हाथों में शङ्ख, चक्र, गदा, पद्म, आदि सुशोभित हैं और प्रसन्न चित्त हो मुरली बजा रहे हैं।
लीलाधर पर सभी आभूषणों, मुकुट, तोड़ी, कंगन, कुण्डल शोभित कर रहे हैं।
कान्हा के अधरों पर मनमोहक मुस्कान है।
जिन सनातनी शिल्पकारों ने इन्हें बनाया है उन्हें कोटि कोटि साधुवाद। (चित्र - साभार)
ॐ देवकीनंदनाय विद्महे वासुदेवाय धीमहि तन्नो कृष्णः प्रचोदयात्।।
ॐ भद्रं कर्णेभिः शृणुयाम देवा भद्रं पश्येमाक्षभिर्यजत्राः।
स्थिरैरङ्गैस्तुष्टुवाँसस्तनूभिर्व्यशेम देवहितं यदायुः॥
स्वस्ति न इन्द्रो वृद्धश्रवाः स्वस्ति नः पूषा विश्ववेदाः।
स्वस्ति नस्तार्क्ष्यो अरिष्टनेमिः स्वस्ति नो बृहस्पतिर्दधातु॥
ॐ शान्ति.! शान्ति.! शान्ति.!!!
अद्वितीय सनातन धरोहर...!!
जय सनातन धर्म 🙏🚩
जय श्री द्वारकाधीश 🙏🌺
जय महाकाल🙏🔱🚩
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