सनातन धर्म और हम

चमत्कार देखने हेतु सनातनी दृष्टि चाहिए ना कि वामजीवियों की दूषित दृष्टि।

सनातनी चमत्कार तो एक ढूंढो सहस्र मिलेंगे.!

अनिवार्यता है सनातनी दृष्टि की क्योंकि वामजीवियों ने तो सनातनी गौरव/शौर्य/संस्कार/पवित्रता का सत्यानाश करने में कोई कमी नहीं छोड़ा है।

यह अद्भुत दृश्य श्री सप्तेश्वर महादेव का है।

इस अतिप्राचीन शिवलिङ्गम का अभिषेक सप्त (सात) धाराएँ अनवरत करती रहती हैं। अतः इसे सप्तेश्वर महादेव कहा जाता है।

ये निरंतर गिरने वाली सप्त धाराएँ किस श्रोत से आती हैं, इसका उद्गम स्थल क्या है, यह आज भी रहस्य बना हुआ है।

एक अद्वितीय विशिष्टता है कि ऋतु ग्रीष्म हो या शरद ऋतु या शिशिर ऋतु शिवलिङ्गम पर गिरने वाले जल के तापमान में कोई अंतर नहीं होता है। यह जल सदैव स्वच्छ और शीतल ही बना रहता है।

क्यों है ना अचंभित करने वाली बात.???

पौराणिक कथाओं के अनुसार यह साढ़े तीन सहस्र वर्षों से सभी अनुसंधान को धता बताते हुए एक अनसुलझा रहस्य बना हुआ है।

यह अलौकिक दृश्य श्री सप्तेश्वर महादेव मन्दिर, साबरकांठा जनपद, गुजरात में है। (चित्र – साभार)

इस दुर्लभ दृश्य से युक्त महादेव मन्दिर बीजापुर के निकट साबरमती नदी के तट पर स्थित है।

अद्भुत सनातन धरोहर...!!

जय सनातन धर्म🙏🚩

जय महाकाल 🙏🔱🚩
#प्रेमझा

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