सनातन धर्म और हम
ब्रह्मा पुत्र दक्ष प्रजापति ने यज्ञ का आयोजन किया और सभी देवों, ऋषियों आदि को आमंत्रित किया।
किन्तु जगतपिता महादेव को निमंत्रण नहीं भेजा।
माता सती पति इच्छा के विरुद्ध जाकर अपने पिता दक्ष प्रजापति के यज्ञस्थल में पहुँची।
परन्तु वहाँ अपने पति का अपमान सहन नहीं कर पाईं और अपने जीवन को समाप्त कर लिया।
जगतपिता महादेव के अंश से उत्पन्न वीरभद्र यज्ञ का विध्वंस कर दिया।
वीरभद्र भगवान शिव के आवेश रूप से उत्पन्न हैं अतः अत्यंत क्रोधित और विकराल प्रतीत होते हैं।
यह भगवान महादेव के प्रकोप रूप ही हैं।
श्री वीरभद्र जी की अद्भुत प्रतिमा निजागल के मन्दिर में स्थापित है।
(चित्र-साभार)
यह लोकप्रिय मन्दिर निजागल, तमकुर जनपद, कर्नाटक में स्थित है।
श्री वीरभद्र जी की प्रतिमा अस्त्र शस्त्र से सुसज्जित है।
श्री वीरभद्र जी के मुखमण्डल पर क्रोध स्पष्ट है।
श्री वीरभद्र जी में भक्तों का अगाध श्रद्धा है।
वैभवशाली सनातन धरोहर...!!
जय सनातन धर्म🙏🚩
जय महाकाल 🙏🔱🚩
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