सनातन धर्म और हम
एक अनूठा अद्वितीय शिवलिङ्गम जिस में भगवान वामनपुरीश्वर और देवी अम्बुजाक्षी उकीर्ण हैं।
जिस गोपनीयता से ये यहां निर्मित हैं उसी प्रकार श्रद्धालुओं को भी कुछ क्षणों के लिए ही इनका दर्शन उपलब्ध होता है और पुनः इन्हें आवरण से ढँक दिया जाता है।
इनका निर्माण छठी सदी में चोल राजाओं द्वारा करवाया गया था।
ये मन्दिर तिरुमणिकुझि, कुड्डालोर, तमिलनाडु में स्थित हैं।
(चित्र –साभार)
इसकी किंवदंती है कि श्री हरि नारायण विष्णु के अनन्य भक्त प्रह्लाद के पौत्र चक्रवर्ती बलि पूर्व जन्म में चूहा थे।
एक बार दीपक से घृत खाने के समय दीपक की बाती अनजाने में ऊपर उठ गया।
दीपक की बाती बुझने वाली थी परंतु वह ऊपर उठने के कारण पुनः जल उठी।
इससे भगवान शिव प्रसन्न होकर उस चूहे को अगले जन्म में असुर योनि में जन्म लेने और श्री हरि विष्णु का अनुग्रह प्राप्ति का वरदान दिए।
वही चूहा अगले बलि के रूप में जन्म लिया और श्री हरि विष्णु के अनुग्रह से चिरंजीवी व अमर हो गया।
मान्यता है कि देवी अम्बुजाक्षी की आराधना से सन्तान प्राप्ति की मनोकामना पूर्ण होती है।
इस स्थान का नाम "तिरु (एक सम्मानजनक उपसर्ग) + मणि (श्रीविष्णु) + कुझि (स्थान) = तिरुमणिकुझि पड़ा।
वैभवपूर्ण सनातन धरोहर...!!
जय सनातन धर्म🙏🚩
जय महाकाल 🙏🔱🚩
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