सनातन धर्म और हम

आर्यावर्त के प्रत्येक पाषाण खण्ड में सनातन धर्म का गौरवान्वित शौर्यपूर्ण इतिहास लिखा हुआ है।

इस इतिहास को पढ़ने वाले लोगों में जिज्ञासा, ललक और तत्परता अवश्य ही होना चाहिए।

अन्यथा वे इसमें लिखे इतिहास के अर्थ को नहीं जान सकते हैं।

भोग नन्दीश्वर मन्दिर का निर्माण नौवीं सदी में नन्दी पहाड़ों के तलहटी पर किया गया है।

यह अद्वितीय मन्दिर आदिदेव भगवान शिव को समर्पित है।

भोग नन्दीश्वर मन्दिर, चिक्कबल्लपुर, कर्नाटक में स्थित है।
(चित्र - साभार)

इस मन्दिर का निर्माण उस काल में हुआ है जब "किताबी" अस्तित्व में भी नहीं आया था।

ध्यान से जूम करके देखें, जिन आकृतियों को कागज पर भी उकेरना असम्भव है उन्हें हमारे पूर्वजों ने पत्थरों पर त्रुटिरहित निर्माण किए हैं।

वास्तव में विचार करें तो आधुनिक युग में लेजर तकनीकों से भी इसकी प्रतिलिपि बनाना कदाचित असम्भव ही होगा।

और अब वर्तमान में "कटपीस" सनातनी मन्दिरों/देवालयों पर अनैतिक अवैध अतिक्रमण कर उस पर अपने नाम का "लेबल" चिपका कर अधिकार दिखाता है। 

क्या आज हम उन सनातनी शिल्पकारों वास्तुकारों के निःस्वार्थ परिश्रम और पुरुषार्थ तथा धर्म के प्रति समर्पण की तुलना में अपने सनातन धर्म और संस्कृति परंपरा के प्रति उतना ही समर्पित हैं.??

विचार करें... अवश्य विचार करें..!!

अतुलनीय सनातन धरोहर...!!

सभी सनातनी मन्दिरों को सरकारी नियंत्रण से मुक्त करवाने हेतु केंद्र सरकार पर दबाव बनाएँ।

जय सनातन धर्म🙏🚩

जय महाकाल🙏🔱🚩
#प्रेमझा

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