सनातन धर्म और हम

इस चिर प्रतीक्षा में बैठे नन्दी महाराज के चित्र को zoom करके ध्यान से देखें.!!

क्यों.!!! अचम्भित हो गए.??

चौंक गए.??

क्या इस नन्दी महाराज के गहने और आभूषणों में कोई त्रुटि दिखाई देती है.??

अब एक बार स्वयं कल्पना करें.... विचार करें... चिंतन करें.. कि क्या इतनी सूक्ष्म कलाकारी मात्र "छेनी-हथौड़ी" से सम्भव है (उस समय तक आधुनिक लेजर तकनीक उपलब्ध नहीं था).??

यदि इतनी सटीकता और सम्पूर्णता छेनी से बनाया जा सकता है तो आज इस जैसा निर्माण क्यों हो पा रहा है.??

इस नन्दी महाराज की सम्पूर्णता का अनुमान लगाने हेतु इसके मुखाकृति, नासिका छिद्र, खूर, पाँव के घुमाव पर ध्यान दें आप इसके जीवंतता से स्वयं प्रभावित हो जाएँगे।

सत्य तो तो यह है कि वामपंथी इतिहासकारों ने षड़यंत्र और सनातनियों को हीन दिखाने के उद्देश्य से ही हमसे झूठ बोला।

हमारी सनातन सभ्यता प्राचीन काल में वर्तमान समय से कहीं अधिक उन्नत थी।

गर्व करें कि हमारे सनातनी पूर्वजों की थाती आज भी अपने गौरवगाथा को विश्व को सुनाने और दिखाने में सक्षम है।

एक बात और.. यह नन्दी महाराज एक ही अखण्ड पाषाण शिला से निर्मित किया गया है।

इसमें कोई जोड़ नहीं है।

इसीलिए निर्माण कार्य संपन्न करने में पूरी तन्मयता और सावधानी बरतनी भी आवश्यक रही होगी क्योंकि एक भी छोटी भूल सारे परिश्रम को व्यर्थ कर सकता था।

यह अद्भुत नन्दी महाराज होयसलेश्वर मंदिर, कर्नाटक में स्थापित हैं। (चित्र - साभार)

अतुलनीय सनातन धरोहर...!!

जय सनातन धर्म🙏🚩

जय महाकाल🙏🔱🚩
#प्रेमझा

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