सनातन धर्म और हम
सनातन संस्कृति के किसी भी शिला खण्ड को आप देखेंगे तो पाएँगे कि उस में निर्मित शिल्प पर एक सम्पूर्ण ग्रन्थ लिखा जा सकता है।
यह शिल्प बादामी गुफा, बादामी जिला, बागलकोट, कर्नाटक में है। (चित्र - साभार)
इस मूर्ति के अंगविन्यास, भाव भंगिमाएँ, आभूषणों और चित्र अलंकरणों को देखकर इसके निर्माण और
निर्माण कार्य से पूर्व परिकल्पना और प्रबंध के बारे में अनुमान लगाएँ।
आप इस अनुमान की कल्पना मातृ से मन्त्रमुग्ध और अचंभित होकर रह जाएंगे।
शिल्पकार ने इतने आकर्षक रूप में कटाव और कमनीता की परिकल्पना कैसे किया होगा।
ध्यान रखें उस समय ना कंप्यूटर था और ना ही ग्राफिक डिजाइनर।
अनायास ही इसे देखने पर जीवित होने का भ्रम उत्पन्न होता है।
इस मूर्ति में देवी एक हाथ से बालक के सिर को सहला कर वात्सल्य प्रकट कर रही है तो दूसरे हाथ से तोते को दाना चुगा रही है।
कितना जीवन्त और भावपूर्ण है यह शिल्प।
सनातनी शिल्पकार ने जिस निपुणता और सटीकता ने इसे निर्माण किया है कि देखकर मन पुलकित हो जाता है।
नमन है उन सनातनी पूर्वजों को जिन्होंने इसे निर्मित किया है और यह सहस्रों वर्षों पश्चात भी अपने पूर्ण आकर्षण में शोभायमान है।
अतुलनीय सनातन धरोहर...!!
जय सनातन धर्म🙏🚩
जय महाकाल 🙏🔱🚩
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