सनातन धर्म और हम

सनातनियों को कथित वामी लुगदी उपन्यासकार (मूढ़ इतिहासकार) ने कितना झूठ बोल और लिख कर भ्रमित एवं हीन भावना से ग्रसित किया है, एक उदाहरण प्रस्तुत है।

ऑस्ट्रेलिया के पहला आधिकारिक खोज का श्रेय विलेम जैंसजून को ई. सन १६०६ में दिया जाता है।

पहला फिरंगी जिसने आर्यावर्त के पवित्र भूमि पर अपना अपवित्र पांव रखा था वह पुर्तगाली नाविक वास्को डी गामा माना जाता है जो ८ जुलाई १४९७ में भारत की खोज में निकला था और वह २० मई १४९८ को केरल के कोझिकोड जनपद के कालीकट (काप्पड़ गाँव) पहुँचा था।

अफ्रीका का खोज यूरोपीय नाविकों ने उन्नीसवीं सदी में किया था।

अर्थात इन लुगदी उपन्यासकार इतिहासकारों के शब्दों में १४९८ व १६०६ तक आर्यावर्त भरतखण्ड का ऑस्ट्रेलिया/अफ्रीका से संपर्क का कोई दूर दूर तक संबंध नहीं था।

अब इस चर्चा को यहीं रोककर संलग्न चित्र को ध्यान से देखें.!!
(चित्र - साभार)

क्या इस प्रस्तर मूर्ति में आपको "जिराफ" गढ़ा हुआ दिखाई देता है.??

ध्यान रखें जिराफ अफ्रीका/ऑस्ट्रेलिया में पाया जाता है और इसे किसी पाषाण शिला पर गढ़ने हेतु उस शिल्पकार को जिराफ को देखना और जानना अवश्य ही अनिवार्य है।

अब इस मूर्ति का वास्तविक इतिहास देखें.....

यह जिराफ विश्व विख्यात कोणार्क सूर्य मन्दिर के भीत पर बना हुआ है।

कोणार्क सूर्य मन्दिर, कोणार्क, ओडिशा।

कोणार्क सूर्य मन्दिर का निर्माण तेरहवीं सदी में गङ्ग वंश के नरेश नरसिंहदेव प्रथम ने बनवाया था

सूर्य मन्दिर कोणार्क को एक रथ के रूप में समुद्र तट पर बनाया गया है।

इस पाषाण रथ में सात घोड़े जुते हुए हैं, चार समुद्र की ओर और तीन भूमि की ओर।

कहा जाता है कि सूर्य मन्दिर कोणार्क को इस प्रकार बनाया गया था कि सूर्यदेव की पहली किरण सीधे गर्भगृह में भगवान विग्रह पर पड़ता था।

लुटेरे फिरंगियों ने इस अतुलनीय मन्दिर को ध्वस्त कर दिया और भगवान सूर्यदेव के दिव्य विग्रह को लेकर भाग गए।

अब कोई यह स्पष्टीकरण प्रस्तुत करे कि जब ऑस्ट्रेलिया का खोज १६०६ में हुआ और पहला फिरंगी १४९८ में आया था तो तेरहवीं सदी में यहाँ के शिल्पकारों को जिराफ के बारे में जानकारी कैसे प्राप्त हुई थी.???

अपने आँखों से पश्चिमी ऐनक को उतार कर फेंक दें।

आर्यावर्त के लोगों का विश्व के सभी भागों और क्षेत्रों से वैदिक काल से ही संपर्क रहा है।

इसलिए आज भी यत्र तत्र सर्वत्र सनातनी मन्दिर/शिवलिङ्गम्/विग्रह आदि मिलते रहते हैं।

गौरवान्वित अनुभव करें अपने सनातनी पूर्वजों की उपलब्धियों पर.!!

वैभवशाली सनातन धरोहर...!!

जय सनातन धर्म 🙏🚩

जय सूर्यदेव 🙏🌺

जय महाकाल 🙏🌺🚩
#प्रेमझा

Comments

Popular posts from this blog

सनातन धर्म और हम

सनातन धर्म और हम

सनातन धर्म और हम