सनातन धर्म और हम

आर्यावर्त के अधिकांश लोग इसके बारे में जानते भी नहीं होंगे क्योंकि यह कोई मकबरा नहीं, म.स्जिद नहीं या मुगलों का हड़पा/कब्जाया कोई महल या राजप्रासाद नहीं है।

क्योंकि वामजीवियों (कथित इतिहासकार) और कांगियों ने तो इतिहास के पाठ्य पुस्तकों में केवल मकबरों, म.स्जिदों, चर्चों को ही महिमामण्डित करने का षड़यंत्र किया है।

यह है श्री तिरुचेंदुर मुरुगन मन्दिर परीसर, तिरुचेंदुर, तमिलनाडु। (चित्र - साभार)

भारतवर्ष के सबसे वृहत मन्दिर समुच्चयों में यह चतुर्थ स्थान रखता है।

यह मन्दिर देवसेना के अधिपति, पर्वतीनन्दन, भगवान श्री सुब्रह्मण्यम कार्तिकेय स्वामी जी को समर्पित है।

यह अपने सौंदर्य और वैभव के लिये प्रसिद्ध है।

इसका अस्तित्व वैदिक काल से ही है।

इसका उल्लेख प्राचीन ग्रन्थों में मिलता है।

यह मन्दिर कुछ एक उन वैभवपूर्ण मन्दिरों में से है जो मुगलों-जेहादियों के खूनी पंजों से तो बच गया पर धूर्त वामपंथी इतिहासकारों और गुलाबो मंडली के खूनी खेल से न बच सका और  इन महान धरोहरों को पाठ्य पुस्तकों से दूर रखा और हम अनभिज्ञ बने रहे।

इसके वैभवशाली निर्माण को देखकर सनातनी पूर्वजों के प्रति मस्तक श्रद्धा से झुक जाता है।

अपने सनातनी मन्दिरों को सरकारी नियंत्रण से मुक्त कराने के लिए केंद्र सरकार पर दबाव बनाएँ।

वैभवशाली सनातन धरोहर...!!

जय सनातन धर्म 🙏🚩

जय मुरुगन कार्तिकेय स्वामी🙏🌺

जय महाकाल 🙏🔱🚩
#प्रेमझा

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