सनातन धर्म और हम
!!.सत्यम शिवम सुंदरम.!!
ईश्वर सत्य है.!!
सत्य ही शिव है.!!
शिव ही सुंदर है.!!
इस चित्र को ध्यानपूर्वक देखें और कल्पना करें कि इसके सृजनकर्ता भक्ति के किस परम् आनन्द की अवस्था में होंगे.!!
इस सनातनी शिल्पकार के हृदय में अपने आराध्य देव के प्रति कितनी श्रद्धा और समर्पण रहा होगा जो इतना जीवन्त विग्रह निर्माण किए हैं।
यह श्री भैरवनाथ का विग्रह श्री पञ्चलिङ्गेश्वर मन्दिर में स्थित हैं।
मुनावल्ली, बेलगवी तालुका, कर्नाटक।
यह भैरव विग्रह कल्याण चालुक्य वंश के शासनकाल १३वीं सदी का निर्माण माना जाता है।
चालुक्य वंश साम्राज्य के संस्थापक पुलकेशिन थे जिन्होंने बादामी (वातापी) में अपनी राजधानी स्थपित किया था।
वास्तव में चालुक्य की राजधानी एहोल (कर्नाटक) रही थी।
जिसे ५४३ ई. में पुलकेशिन प्रथम के द्वारा परिवर्तित कर बादामी कर दिया गया था।
पुलकेशिन का पुत्र कीर्तिवर्धन था उसके कीर्ति पताका को आगे बढ़ाने में सहायक होता रहा।
कर्नाटक के ऐहोल को द्रविड़ वास्तुकला का उद्गम कहा जाता है।
यह चालुक्यों की पहली राजधानी थी और यहाँ उन्होंने छठी शताब्दी के पूर्व अनेक वैभवशाली मन्दिरों का निर्माण करवाया था।
चालुक्यों का साम्राज्य लगभग सम्पूर्ण दक्षिणी भाग में स्थपित था।
इस विग्रह के मुखाकृति पर कितनी शान्ति है।
इस विग्रह के त्रिशूल, डमरू, नागबन्ध और हस्त मुद्राओं को देखें। छोटी से छोटी बातों पर निर्माण के क्रम में ध्यान रखा गया है। (चित्र - साभार)
अतुलनीय सनातन धरोहर...!!
जय सनातन धर्म🙏🚩
जय महाकाल🙏🔱🚩
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