सनातन धर्म और हम
हमारे सनातनी पूर्वजों ने मानव जीवन के सभी भावों को पाषाण पर जीवंत चित्रण किए हुए हैं।
इस पाषण प्रतिमा में माता पार्वती व परमपिता शिव के मध्य अनुपम भाव सम्प्रेषण उकीर्ण किया गया है।
इस प्रतिमा में दर्शाया गया है कि माँ पार्वती परमपिता शिव से रुष्ट हो गई हैं और परमपिता शिव मनुहार कर माँ पार्वती को मनाने रिझाने की चेष्टा में हैं।
कितना अनुपम भावुकतापूर्ण जीवंत चित्रण है।
यह उमा-महेश्वर प्रतिमा श्री सोमेश्वर मन्दिर, कुरुडुमले, कोलार जनपद, कर्नाटक का है।
यह प्रतिमा चोल राजाओं द्वारा (चोल मन्दिर) ११वीं सदी में बनवाया माना गया है।
अद्वितीय सनातन धरोहर...!!
जय सनातन धर्म🙏🚩
जय महाकाल🙏🔱🚩
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