सनातन धर्म और हम
श्री हरि नारायण विष्णु जी की अनुजा देवी मीनाक्षी जी (पार्वती जी) का पाणिग्रहण श्री सुंदरेश्वर जी (महादेव जी) के साथ हुआ था।
मान्यता है कि जिस स्थान पर यह विवाह सम्पन्न हुआ था वहाँ पर श्री मीनाक्षी सुंदरेश्वर मन्दिर स्थित है।
यह श्री मीनाक्षी सुंदरेश्वर मन्दिर का एक दुर्लभ छायाचित्र है (१८७० ई.) (चित्र - साभार)।
इस अनुपम चित्र में श्री हरि अपनी अनुजा माता मीनाक्षी का हाथ प्रभु सुंदरेश्वर को सौंप रहे हैं।
श्री मीनाक्षी सुंदरेश्वर मन्दिर, मदुरै में स्थापित है।
यह आर्यावर्त के दक्षिणी क्षेत्र का एक विश्वविख्यात मन्दिर है।
किसी समय में इस मन्दिर की गणना विश्व के "सात आश्चर्य" में हुआ करता था।
श्री मीनाक्षी सुंदरेश्वर मन्दिर अनुमानतः २५०० वर्ष से भी अधिक प्राचीन माना जाता है।
गोपुरम के आसपास नगर बसे हुए हैं।
मन्दिर के गर्भगृह में शिवलिङ्गम स्थापित हैं।
यह मन्दिर समुच्चय १४ एकड़ के विस्तृत क्षेत्र में विस्तरित है।
इस मन्दिर के ४५०० खम्भे हैं।
इस मन्दिर में १४ अटारी बने हुए हैं।
यह सनातन धर्म का अद्वितीय और अतुलनीय मन्दिर है।
यह मन्दिर द्रविड़ वास्तुकला का अमूल्य धरोहर है।
इस मन्दिर के मनमोहक कलाकृतियों को देख रोमांच की अनुभूति होती है।
आश्चर्यजनक है कि हमारे सनातनी पूर्वजों ने यह अनूठा निर्माण बिना आधुनिक तकनीक और यंत्रों के अपने हाथों से बनाये हैं।
नमन है सनातनी पूर्वजों को जिन्होंने यह श्रमसाध्य निर्माण कार्य किए हैं।
गौरवपूर्ण सनातन विरासत....!!
जय सनातन धर्म🙏🚩
जय माँ मीनाक्षी🙏🌺
जय महाकाल🙏🔱🚩
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