सनातन धर्म और हम

आर्यावर्त का प्राचीन वैदिक सनातन संस्कृति का वास्तुशिल्प, स्थापत्य कला और पाषाण शिल्प कला सम्पूर्ण विश्व में अकल्पनीय और अतुलनीय रहा है।

इनकी आज जो अनुकृति भी बनाई जाती है वह भी अद्भुत और अतुलनीय ही प्रतीत होती है।

क्योंकि एक ओर तो रेगिस्तान वाले जहाँ १९३० ई. तक (जब तक वहाँ खनिज तेल नहीं मिला था) सब बद्दू था तो दूसरी ओर पश्चिम वाले जो १८६० ई. से पहले जिनका शिक्षा का कोई संस्थान ही नहीं था।

और जिन्होंने जितने भी नवाचार/अनुसंधान/शोध का दावा करते हैं वास्तविकता में वह कोलोनियल एरा में आर्यावर्त से लूटे गए पांडुलिपियों का कीर्तिचौर्य ही रहा है, धीरे धीरे यह बात प्रमाणित भी होती जा रही है।

यह अलौकिक नयनाभिरामी मन्दिर समुच्चय सोफॉलोक चार धाम नामची, सोफॉलोक, सिक्किम में स्थित है।

यह सम्पूर्ण स्थली देवाधिदेव महादेव को समर्पित है।

यहाँ सभी १२ (बारह) ज्योतिर्लिंगों की अनुकृति और चार धाम की प्रतिकृति ७ (सात) एकड़ के विस्तृत भूभाग पर निर्माण किया गया है।

यहाँ का मुख्य आकर्षण भगवान शिव जी का २७ मीटर ऊँचा विग्रह है जो मुख्य मन्दिर के शिखर पर ध्यानस्थ बैठे हुए हैं।

विश्व भर के सनातनी धर्मावलंबी इस मनोरम दृश्य के दर्शन हेतु आते हैं।

यहाँ का मनोरम दृश्य स्वर्गतुल्य प्रतीत होते हैं।

वैभवशाली सनातन धरोहर...!!

जय सनातन धर्म🙏🚩

जय महाकाल🙏🔱🚩
#प्रेमझा

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