सनातन धर्म और हम
श्री गणपति भईया सदा से ही गजमुखी नहीं रहे हैं।
वे भी सामान्य देव के जैसे ही रहे थे।
जगतमाता पार्वती के द्वारा द्वार पर खड़े होकर रक्षा करने का आदेश और परमपिता भगवान महादेव का वहां आगमन होना।
भगवान महादेव को प्रवेश द्वार पर श्री गणपति भईया द्वारा रोकना, प्रभु महादेव का क्रोधित होकर उनका मस्तक विच्छेद करना, यह संपूर्ण कथा समस्त सनातनी को ज्ञात है।
श्री आदि गणपति, लंबोदर विनायक जी का यह संलग्न अनुपम छवि है। (चित्र - साभार)
यह विग्रह आदि विनायक या नरमुख पिलैयार या मानवमुखी गणेश का विग्रह तमिलनाडु में स्थपित है।
यह मुक्तिश्वर मन्दिर, तिलातर्पनापुरी (Thilatharpanapuri), तमिलनाडु में स्थित है।
यह मन्दिर मायावरम तिरुवरूर मार्ग पर कथनूर के निकट स्थित है।
गणपत्य एवं शैव श्रद्धालु बड़े ही भक्ति भाव से इस मन्दिर में पूजन अर्चन हेतु आते हैं।
स्थानीय सनातनी लोगों में इस मन्दिर के प्रति प्रगाढ श्रद्धा एवं आस्था है।
सभी सनातनी इनके दर्शन और आशीर्वाद से लाभान्वित होते हैं।
दुर्लभतम सनातन धरोहर...!!
जय सनातन धर्म 🙏🚩
जय गणपति भईया 🙏🌺
जय महाकाल 🙏🌺🚩
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