सनातन धर्म और हम

कोई इस वास्तुशिल्प को दिखलाकर यदि आपसे यह पूछ बैठे कि यह संपूर्ण निर्माण कार्य किस पदार्थ पर किया गया है.??

तो कदाचित आप भी यही कहेंगे कि यह संपूर्ण निर्माण काष्ठ (लकड़ी) पर ही किया गया है।

पर ठहरिए...!! एक क्षण सोचें यदि ऐसा नहीं हुआ हो तब....!?!

भ्रमित हो गए ना.!!

यह निर्माण वास्तव में काष्ठ (लकड़ी) नहीं पाषाण (पत्थर) पर किया गया है।

हमारे सनातनी पूर्वजों की सम्पन्नता, भव्य वास्तुकला, उत्कृष्ट पाषाण शिल्प शैली, आश्चर्यजनक कल्पना, स्वर्गलोक सदृष्य सुंदरता का निश्छल प्रतीक रच दिया है।

सनातन धर्म में अनन्य आस्था, अडिग विश्वास,  चरम भक्ति, और पवित्र उपासना के प्रतीक ये मंदिर सजीवता का प्रतिबिम्ब है। (चित्र - साभार)

अचरज मत करें ये तो सनातन स्थापत्य शिल्पकला का छोटा उदाहरण है जो मिटा दिया गया है आपके इतिहास के पाठ्य पुस्तकों से वामियाें के षडयंत्र रचने के कारण और आपको हीन भावना से ओतप्रोत करने हेतु.!!

काशीराज काली मन्दिर, बनारस।

नगर की हृदय स्थली में शिव - शक्ति का वास, काशी राज परिवार का बनवाया माँ काली व पंचदेव का भव्य मन्दिर  गोदौलिया चौक के निकट ही पत्थरों से कलात्मकता के साथ बनाया गया आकर्षक द्वार जिज्ञासा के पट खोलता है।

इस भव्य मन्दिर का निर्माण काशी नरेश श्री नरनारायण जी की पत्नी एवं महाराज प्रभु नारायण सिंह की माता जी ने संवत् १९४३ ई. में कराया था।

इसमें पंचदेव की स्थापना के साथ ही शिव परिवार समेत नन्दी महाराज को भी विराजमान कराया गया है।

निर्माण से संबंधित शिलापट्ट भी परिसर में विद्यमान है।

काली मंदिर से सटे शिवालय में श्री गौतमेश्वर महादेव विराजमान हैैं।

जनश्रुतियों के अनुसार आदि काल में यह गौतम ऋषि का आश्रम था।

गौतम ऋषि ने देवाधिदेव महादेव की स्थापना कर पूजन अर्चना किया था।

स्थानीय लोगों के कथनानुसार इस अनुपम शिवलिङ्गम को स्वयंभू भी माना जाता है।

वर्तमान में गौतमेश्वर शिवलिङ्गम अपने दिव्य रूप में विराजमान हैं।

वैभवशाली सनातन धरोहर...!!

जय सनातन धर्म 🙏🚩

जय माँ महाकाली 🙏🌺

जय महाकाल 🙏🌺🚩
#प्रेमझा

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