सनातन धर्म और हम

जब देवी सती अपने पिता के यज्ञ कुण्ड में कूदकर अपने प्राण त्याग दीं और भगवान शिव उनके निर्जीव शरीर को अपने कंधों पर उठा कर संहार ताण्डव करने लगे। सम्पूर्ण सृष्टि त्राहिमाम करने लगी तो श्री विष्णु ने अपने सुदर्शन चक्र से देवी सती के शरीर के अनेक भागों में विभाजित कर दिये।

जहाँ जहाँ भी देवी सती के अंग गिरे आर्यावर्त में वह स्थान शक्तिपीठ बन गए।

आर्यावर्त में ५१ शक्तिपीठ रहे हैं किंतु इस खंडित भूमि में अब ४९ ही हैं (हिंगलाज माता पाकिस्तान और ढाकेश्वरी बांग्लादेश में हैं)।

भारत में प्रथम हिन्दवी साम्राज्य के संस्थापक छत्रपति शिवाजी महाराज भी एक शक्तिपीठ के अनन्य भक्त रहे।

उन्होंने देवी तुलजा भवानी माता का सदैव पूजन अर्चना किए। देवी तुलजा भवानी उन्हीं ५१ शक्तिपीठों में एक हैं।

माँ तुलजा भवानी तुलजापुर, उस्मानाबाद जनपद, महाराष्ट्र में स्थित हैं। (चित्र - साभार)

देवी तुलजा भवानी माता का मन्दिर किला परिसर ही है। इस किले का निर्माण छत्रपति शिवाजी महाराज ने ही करवाया था और वे नियमित रूप से माँ भवानी की आराधना करते थे।

वैभवशाली सनातन धरोहर...!!

जय सनातन धर्म 🙏🚩

जय माँ तुलजा भवानी🙏🌺

जय महाकाल 🙏🔱🚩
#प्रेमझा

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