सनातन धर्म और हम
ये भव्य अद्वितीय माँ महिषासुरमर्दिनी की प्रतिमा एक ही पाषण शिला से निर्मित है।
इस प्रतिमा में माँ दुर्गा महिषासुर का वध कर रही हैं।
माँ महिषासुरमर्दिनी के प्रतिमा को अष्टभुजी बनाया गया है।
माँ अम्बे अपने त्रिशूल से महिषासुर का वध कर रही हैं जो महिष से उत्पन्न होता निर्मित किया गया है।
यह गङ्ग राजवंश, ओडिशा का तेरहवीं सदी का निर्माण निर्धारित किया गया है। (चित्र - साभार)
इसकी प्रतिमा का जीवंत अंगविन्यास, आभूषणों का अति जटिल और सूक्ष्म नक्काशी देखने पर रोमांच उत्पन्न करते हैं।
सर्व ज्ञात है कि ग्रेनाइट सबसे कठोर चट्टान है तो इस महीन नक्काशी को किन यन्त्रो द्वारा किया गया होगा जब कि उस समय लेज़र तकनीक का आविष्कार नहीं हुआ था, आश्चर्यजनक है न.!!
हाँ, इतना तो है कि इसे छेनी हथौड़ी से नहीं बनाया गया होगा।
महान सनातनी शिल्पकारों के कला निपुणता पर गर्व है।
दुर्भाग्यपूर्ण विडंबना है कि अब यह खंडित है।
महान सनातन धरोहर...!!
जय सनातन धर्म🙏🚩
जय माँ अम्बे दुर्गा 🙏🌺
जय महाकाल 🙏🔱🚩
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