सनातन धर्म और हम

सत्य सदा ही कल्पना से भी विचित्र होता है..!!!

अद्वितीय, अतुलनीय, अकल्पनीय..!!!!

१५०० वर्ष पूर्व, ३०० वर्षों तक, २० पीढ़ियों ने पहाड़ को उपर से नीचे की ओर बढ़ते हुए क्रम में पत्थरों को काट - काट कर बनाया है यह "श्री कैलाश मन्दिर".!

सामान्यतः किसी भी मन्दिर, भवन आदि का निर्माण आधार से शिखर की ओर बढ़ते हुए क्रम में किया जाता है।

परंतु इस मन्दिर की ठीक इसके विपरित शिखर से आधार की ओर बढ़ते हुए क्रम में किया गया है।

श्री कैलाश मन्दिर, वेरुल लेणी, सम्भाजी नगर, महाराष्ट्र।
(चित्र - साभार)

विश्व के किसी भी स्मारक से लाखों गुणा सुन्दर और आकर्षक है यह मन्दिर समुच्चय।

सनातनी पूर्वजों के पाषाण शिल्प कला का अद्भुत उदाहरण है।

संपूर्ण सनातन पौराणिक कथाओं के शिल्प निर्मित हैं इस मन्दिर में।

इस मन्दिर में श्री हरि नारायण विष्णु अवतार, भगवान देवाधिदेव महादेव से लेकर रामायण, महाभारत आदि को भी मूर्तियों के रूप में दर्शाए गए हैं।

यह सम्पूर्ण निर्माण जब आधुनिक तकनीक उपलब्ध नहीं था तब का निर्माण है, वो भी १५०० वर्ष पहले का।

बिना किसी विद्युत चालित यंत्रों के और बिना कंप्यूटर ग्राफिक्स की सहायता के, जो आज के आधुनिक काल में भी स्यात असंभव सा प्रतीत होता है।

इसके ज्यामितीय ज्ञान से उस समय के सनातनी पूर्वजों के गणित एवं मापन प्रणाली के उत्कृष्टता का सहज अनुमान लगाया जा सकता है।

इस मन्दिर के निर्माण प्रक्रिया में अनुमानतः चालीस लाख टन पत्थर काटकर अवशिष्ट के रूप में हटाया गया होगा।

किन्तु सबसे आश्चर्यजनक तथ्य है कि उन अवशिष्ट पत्थरों का निस्तारण कहाँ किया गया था यह आज तक विज्ञानियों के लिए भी एक पहेली ही है, क्योंकि इतनी बड़ी मात्रा में पत्थरों के कटे अंश दूर - दूर तक कहीं नहीं मिलते हैं।

किंतु अधिकांश देशवासी इसके बारे में कहाँ जानते हैं, क्योंकि इतिहासकार को इसके बारे में लिखने का समय ही नहीं मिला..!!!

ये विश्व का सबसे श्रेष्ठ वास्तुशिल्प हैं, समकालीन विश्व भर में ऐसा अतुलनीय वास्तुशिल्प कोई भी उपलब्ध नहीं है।

लेकिन विधर्मियों ने इसे ईर्ष्या से क्षतिग्रस्त कर दिया है।

वैभवशाली सनातन धरोहर...!!

जय सनातन धर्म🙏🚩

जय महाकाल🙏🔱🚩
#प्रेमझा

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