सनातन धर्म और हम

ऐसा अविश्वसनीय, अकल्पनीय, अद्वितीय भव्य मन्दिर जिसे देखकर दर्शकों के मन में आश्चर्य और कौतूहल से एक ही प्रश्न उठता है, -

"कैसे.. कैसे... कैसे.... यह निर्माण सम्भव हुआ.???"

इस मन्दिर का निर्माण चोल सम्राट राजराजा चोल प्रथम ने करवाया था इसीलिए इस मन्दिर को राजराजेश्वर मन्दिर भी कहा जाता है।

ये हैं भगवान शिव को समर्पित श्री बृहदेश्वर मन्दिर, तंजावूर, तमिलनाडु।

इस मन्दिर का विशिष्टता :-

यह मन्दिर नींव रहित निर्माण है।

इस मन्दिर निर्माण में सीमेंट या कोई जोड़ने वाले सामग्री का उपयोग नहीं किया गया है।

इस मन्दिर का निर्माण ९९५ ई. में आज से १०३० वर्ष पूर्व में हुआ है। इस समय तक विश्व के अनेक देशों में एक विद्यालय तक नहीं था।

इस मन्दिर का सम्पूर्ण निर्माण "पहेली-विधि" (interloking system) के आधार पर हुए हैं।

इस मन्दिर की ऊँचाई (नींव रहित) २१६' फीट है।

इस मन्दिर का विमान ८१ टन भार का है जो एक ही पाषण शिला (ग्रेनाइट) से बना हुआ है।

इस मन्दिर में सम्पूर्ण निर्माण में कुल १३०,००० टन ग्रेनाइट पत्थरों का उपयोग हुआ है।

इस मन्दिर में एक ही ग्रेनाइट शिला खण्ड से आभूषणों से सुसज्जित विशाल नन्दी बना हुआ है।

इस मन्दिर में बने मूर्तियों, पशु पक्षियों, पुष्प बूटों, कलाकृतियाँ जीवन्त प्रतीत होते हैं।

अपने आश्चर्यजनक निर्माण के लिए यह यूनेस्को विश्व धरोहरों में सम्मिलित है।

वैभवशाली सनातन धरोहर...!!

जय सनातन धर्म🙏🚩

जय महाकाल 🙏🔱🚩
#प्रेमझा

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