सनातन धर्म और हम
बर्बर, असभ्य, लुटेरे रेगिस्तानी बद्दूओं ने अपने सनातन धर्म के प्रति घृणा, शत्रुता और हीनभावना में किस प्रकार हमारे सनातन विरासत को नष्ट-भ्रष्ट किया उसका ज्वलंत उदाहरण यह मन्दिर है।
विश्व के अद्वितीय मन्दिरों में से एक श्री सहस्रबाहु मन्दिर, उदयपुर, राजस्थान में है।
सहस्रबाहु अर्थात जिनके एक सहस्र बाहु हों, ये भगवान श्री हरि विष्णु ही का पर्याय है।
सहस्रबाहु मन्दिर नागदा गाँव में स्थित, उदयपुर से २३ की. मी. दूरी पर है।
इस मन्दिर का समस्त दीवार रामायण के कथाओं से अलंकृत हैं। रामायण की सम्पूर्ण गाथा मूर्तियों में गढ़ कर इस मन्दिर को आभूषित किया गया है।
इस मन्दिर का कोई भी एक फीट स्थान मूर्तियों, कलाकृतियों से रहित नहीं ढूंढ पाएँगे।
दुर्भाग्यवश, इस मन्दिर को विधर्मियों, आक्रांताओं ने ध्वस्त कर दिया है। आज जो कुछ हमें दृश्य है वह जीर्ण शीर्ण अवस्था में ही है।
कल्पना करें कि जब जीर्ण शीर्ण अवस्था में यह मन्दिर इतना आकर्षक है तो अपने सम्पूर्णता में यह कितना भव्य और वैभवपूर्ण रहा होगा.??
क्या इस पाप के लिए रेगिस्तानी बद्दूओं को कभी क्षमा किया जा सकता है.??
सनातनी शिल्पकारों के कृतियों को देख मस्तक स्वमेव नत हो जाता है।
महान सनातन धरोहर......!!
जय सनातन धर्म 🙏🚩
जय श्री हरि नारायण 🙏🌺
जय महाकाल 🙏🔱🚩
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