सनातन धर्म और हम

बौद्ध उपासना पद्धति में तीन स्थलों का महत्वपूर्ण स्थान होते हैं...

१. स्तूप - जहाँ बुद्ध के अवशेष रखे होते हैं और इसे एक विशालकाय पिंड की संरचना में निर्माण किया जाता है।

२. चैत्य - विशाल रिक्त भवन जहाँ बौद्ध भिक्षु सामुहिक ध्यान करते हैं।

३. विहार - यह कोठरी नुमा संरचना जो अनेक की संख्या में हो सकता है और जहाँ बौद्ध भिक्षु निवास करते हैं।

एक प्राचीन चैत्य जिसे देखकर उस समय में लोगों के वास्तु तकनीकी के उत्कृष्टता का सहज अनुमान हो जाता है।

ये चैत्य गृह भज गाँव के कन्दराओं में लोनावाला के निकट पुणे, महाराष्ट्र में स्थित है।

इस चैत्य गृह का निर्माण पाषाण खण्डों से नहीं बल्कि सम्पूर्ण पहाड़ों को ही काटकर निर्माण किया गया है।

Zoom करके देखें...!!

जिस विशालकाय संरचना को कंक्रीट से भी बनाना दुःसह और असम्भव प्रतीत होता है उसे सनातनी पूर्वजों ने किस सहजता से पहाड़ों को काटकर बना दिए हैं।

अकल्पनीय, अद्वितीय वास्तुशिल्प का अतुलनीय उदाहरण है यह चैत्य गृह.!!

सूक्ष्म और दुर्लभ कलाकृति अचंभित करते हैं।

यह चैत्य गृह बौद्ध धर्म के हीनयान शाखा से सम्बद्ध है।

अब तो यह अप्रतिम स्थल केवल दर्शन के लिए ही उपलब्ध है क्योंकि यहाँ अब बौद्ध भिक्षु अपने ध्यान का अभ्यास नहीं करते हैं।

इसे देखकर जब आप यहाँ होने वाले सक्रिय ध्यान अभ्यास की कल्पना करेंगे तो एक रोमांचक अनुभूति से रोम रोम पुलकित हो जाएँगे।

वैभवपूर्ण सनातन धरोहर....!!

जय सनातन धर्म 🙏🚩

जय महाकाल 🙏🌺🚩
#प्रेमझा

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